मराठी भाषा विवाद में दिग्गज बिजनेसमैन की एंट्री, कहा- मैं नहीं सीखूंगा, क्‍या करना है बोल...

मराठी भाषा विवाद में दिग्गज बिजनेसमैन की एंट्री, कहा- मैं नहीं सीखूंगा, क्‍या करना है बोल...

Sushil Kedia:  महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर चल रहा विवाद अब एक गर्मागर्म सांस्कृतिक और राजनीतिक जंग का रूप ले चुका है। अब इस विवाद में निवेशक सुशील केडिया जैसे लोग भी कूद पड़े हैं। केडियॉनॉमिक्स के संस्थापक सुशील केडिया ने सोशल मीडिया पर खुलेआम ऐलान किया है कि वे मराठी सीखने से साफ इनकार करते हैं। एक्स पर उद्धव ठाकरे को टैग करते हुए केडिया ने तीखे अंदाज में लिखा, "मुंबई में 30 साल बिताने के बावजूद मैं मराठी ढंग से नहीं बोल पाता, और आपके जैसे लोगों के बर्ताव की वजह से मैंने ठान लिया है कि जब तक मराठी मानुस की आड़ में आप जैसे लोग अपनी सियासत चमकाते रहेंगे, मैं मराठी सीखने का नाम नहीं लूंगा। अब बताइए, क्या करूं?"

माराठी न बोलने की वजह से किया था हमला 

सुशील केडिया का  मराठी भाषा को लेकर यह बयान उस वायरल वीडियो के बाद आया, जिसमें कथित तौर पर MNS के कार्यकर्ताओं ने मीरा रोड के एक दुकानदार, 48 साल के बाबूलाल खिमजी चौधरी, पर सिर्फ इसलिए हमला कर दिया, क्योंकि उनके एक कर्मचारी ने हिंदी में जवाब दिया। चौधरी के मुताबिक, उनके कर्मचारी दूसरे राज्यों से हैं और मराठी नहीं जानते। इस बात पर बहस छिड़ गई, जो देखते-देखते मारपीट में बदल गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, और लोग इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। यह विवाद अब सिर्फ भाषा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान, क्षेत्रीय गर्व और सहअस्तित्व के सवालों को उभार रहा है।

'मराठी तो बोलनी ही पड़ती है....'राज्य मंत्री

मराठी भाषा को लेकर उठे इस विवाद पर कई राजनेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। मामले को लेकर राज्य मंत्री कदम योगेश ने अपनी बात रखते हुए कहां 'महाराष्ट्र में आपको मराठी बोलनी ही पड़ती है। अगर आपको मराठी नहीं आती है, तो आपका रवैया यह नहीं होना चाहिए कि आप मराठी नहीं बोलेंगे। अगर महाराष्ट्र में कोई मराठी का अपमान करता है, तो हम अपने कानून लागू करेंगे'। साथ ही कदम ने ये साफ किया की वो भाषा को लेकर हो रही हिंसा के खिलाफ है और इसकी कड़ी निंदा करते। आगे कदम कहते है जिन लोगों के साथ भाषा को लेकर मारपीट हो रही है उन्हें पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए थी।

FIR दर्ज होने के बाद अपने बचाव में बोलें MNS अधिकारी

घटना की शिकायत के बाद, हमले में शामिल सात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। एमएनएस के एक पदाधिकारी ने इस झगड़े का बचाव करते हुए दुकानदार के "घमंडी" रवैये को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि जब यह घटना हुई, तब ये लोग राज्य सरकार द्वारा भाषा नीति प्रस्ताव वापस लिए जाने का जश्न मना रहे थे और पानी खरीदने गए थे।

 

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