
नई दिल्ली: जस्टिस यूयू ललित ने देश के 49वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली है। आज राष्ट्रपति भवन में उन्हें राष्ट्रपतिद्रौपदी मुर्मू ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। जस्टिस उदय उमेश ललित ने जस्टिस एनवी रमना की जगह ले रहे हैं, जोकि 26 अगस्त को मुख्य न्यायाधीश के रूप में रिटायर हुए हैं। वैसे तो किसी भी न्यायाधीश का कार्यकाल 1 साल या उससे ज्यादा का होता है,वही जस्टिस यूयू ललित का कार्यकाल केवल 3 महीनो का होगा। लेकिन क्या आपको पता है कि इस से पहले भी ऐसा हो चुका है जब मुख्य न्यायाधीश का पद केवल 17 दिन के लिए संभाला गया था?
बता दें कि, न्यायामूर्ति कमल नारायण सिंह ने अब तक के सबसे छोटे मुख्य न्यायाधीश के कार्यकाल का रिकॉर्ड बनाया है।इस के साथ न्यायमूर्ति एमएच कानिया ने न्यायमूर्ति सिंह का स्थान लिया और 13दिसंबर 1991से 17नवंबर तक इस पद पर बने रहे। जस्टिस एमएच कानिया जस्टिस सिंह के उत्तराधिकारी बने और 13दिसंबर 1991से 17नवंबर 1992तक इस पद पर रहे।सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अपनी वरिष्ठता के आधार पर CJI के रूप में कार्यभार संभालते हैं, जबकि CJI के लिए कोई कार्यकाल निर्धारित नहीं है, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु संविधान के तहत 65 वर्ष निर्धारित की गई है।
कमल नारायण के बारें में
कमल नारायण सिंह का जन्म 13 दिसंबर 1926 को हुआ था। उन्हें भारत का 22वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में चुना गया था।इसके अलावा उन्होंने सिरसा के LRLAहाई स्कूल और इलाहाबाद के इविंग क्रिश्चियन कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक है। वहीं 17 दिनों में, मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल सबसे छोटा रहा है।
जस्टिस यूयू ललित के पिता रह चुके है जज
जस्टिस यूयू ललित को कानून और न्याय का ज्ञान उन्हें अपने परिवार की विरासत मे मिला है। जस्टिस ललित के दादा रंगनाथ ललित एक जानें माने वकील रहे है। वही न्याय के क्षेत्र के इस सफर को उनके बेटे आरयू ललित ने एक कदम औऱ आगे बढ़ाया जिसके बाद उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। जस्टिस यूयू ललित अपने परिवार में तीसरी पीढ़ी के वकील रहे, फिर सुप्रीम कोर्ट के जज बने और अब देश के मुख्य न्यायाधीश पद तक पहुंचे हैं।
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