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धर्म परिवर्तन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, नहीं मिलेगा अनुसूचित जाति का फायदा

धर्म परिवर्तन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, नहीं मिलेगा अनुसूचित जाति का फायदा

Supreme Court Verdict: देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि जो व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, वह अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं माना जाएगा और उसे SC/ST एक्ट के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा नहीं मिलेगी। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और एन वी अंजारिया की बेंच ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि ईसाई धर्म अपनाने पर अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत और पूरी तरह खत्म हो जाता है।

ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था मान्य नहीं- कोर्ट

ये मामला एक पादरी चिंथाडा आनंद से जुड़ा था, जिन्होंने आरोप लगाया था कि उनके साथ जाति के आधार पर मारपीट और गाली-गलौज की गई। उन्होंने SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज कराया था। लेकिन आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि आनंद ईसाई धर्म अपना चुके हैं और पादरी के रूप में काम कर रहे हैं, इसलिए उन्हें SC का लाभ नहीं मिल सकता। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए FIR को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था मान्य नहीं है, इसलिए धर्म परिवर्तन के बाद SC का दर्जा खत्म हो जाता है।

सिर्फ जाति प्रमाण पत्र होने से कोई लाभ नहीं- अदालत

सुप्रीम कोर्ट ने इसी बात को दोहराते हुए कहा कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के अनुसार केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म मानने वाले ही SC श्रेणी में आते हैं। कोर्ट ने कहा कि यह नियम पूरी तरह लागू होता है और इसमें कोई अपवाद नहीं है। अदालत ने यह भी साफ किया कि कोई व्यक्ति एक साथ किसी अन्य धर्म को मानते हुए SC का दर्जा नहीं रख सकता। साथ ही, सिर्फ जाति प्रमाण पत्र होने से कोई लाभ नहीं मिलता, अगर व्यक्ति ने धर्म बदल लिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने की अपील खारिज

कोर्ट ने पाया कि आनंद पिछले कई वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहे थे और पादरी के रूप में काम कर रहे थे। इसलिए उन्हें SC/ST एक्ट का लाभ नहीं दिया जा सकता। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए दोहराया कि धर्म परिवर्तन के बाद SC का दर्जा खत्म हो जाता है और इससे जुड़े सभी कानूनी लाभ भी नहीं मिलेंगे।

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