
Supreme Court: बीते कुछ समय पहले यूपी में बच्ची से हुए उत्पीड़न के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि बच्ची के ब्रेस्ट को छूना और सलवार का नाड़ा खींचना रेप नहीं है। वहीं, अब हाई कोर्ट के इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि हमें इस फैसले को सुनकर बहुत दुख हुआ।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, बीते कुछ समय पहले यूपी में 11साल की बच्ची से हुए उत्पीड़न का मामला सामने आया था। जिस पर 17मार्च को इलाहाबाद HC ने फैसला सुनाया कि बच्ची का ब्रेस्ट पकड़ना रेप नहीं हो सकता। जिसके बाद आज सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुमवाई हुई। इस मामले की सुनवाई जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने की और HC के इस फैसले पर रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें बहुत दुख है। क्योंकि ये फैसला खुद एक जज ने सुनाया है। एक जज ने ऐसे कठोर शब्दों का प्रयोग किया है। हाईकोर्ट के आदेश के कुछ पैराग्राफ जैसे 24, 25और 26में जज द्वारा संवेदनशीलता की कमी को दिखाता है। क्योंकि फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया था। इस मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसले को सुरक्षित रखने के 4महीने बाद सुनाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस गवई ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है। इसलिए हमें सोच-समझकर फैसला करने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि हम दो हफ्ते बाद यानी मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करेंगे। बता दें, इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने कहा था कि सिर्फ पीड़िता के ब्रेस्ट को पकड़ना, और पाजामे के नाड़ा खींचने के आधार पर आरोपी के खिलाफ रेप की कोशिश का मामला नहीं किया जा सकता।
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