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आज का इतिहास: इस हादसे की वजह से भारत  के 800 लोगों ने  गंवाई थी अपनी जान, इस योजना को लेकर भारत-पाकिस्तान ने बढ़ाया था दोस्ती का हाथ

आज का इतिहास: इस हादसे की वजह से भारत के 800 लोगों ने गंवाई थी अपनी जान, इस योजना को लेकर भारत-पाकिस्तान ने बढ़ाया था दोस्ती का हाथ

नई दिल्ली: वैसे तो इतिहास के पन्नों में हर दिन किसी न किसी के नाम से घटना दर्ज होती है। लेकिन आज का दिन खासतौकर पर सिखों के लिए गहरा जख्म देकर गया था। दरअसल आज के दिन यानी 6 जून को स्वर्ण मंदिर में सेना का ऑपरेशन ब्लूस्टार खत्म हुआ था। अकाल तख्त हरमंदिर साहिब की तरफ बढ़ती सेना का जरनैल सिंह भिंडरावाले और खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों ने जमकर विरोध किया और इस दौरान दोनों तरफ से भीषण गोलीबारी हुई थी। भारी खूनखराबे के बीच अकाल तख़्त को भारी नुकसान पहुंचा और कई सदियों में पहली बार ऐसा हुआ कि हरमंदिर साहिब में गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ नहीं हो पाया। वहीं पाठ न हो पाने का यह सिलसिला 6, 7 और 8 जून तक चला। ...

आज का इतिहास: स्वर्ण मंदिर को उग्रवादियों से बचाने के लिए चलाया गया था अभियान, औरंगजेब ने आधिकारिक रूप से दिल्ली पर किया था कब्जा

आज का इतिहास: स्वर्ण मंदिर को उग्रवादियों से बचाने के लिए चलाया गया था अभियान, औरंगजेब ने आधिकारिक रूप से दिल्ली पर किया था कब्जा

नई दिल्ली: साल के छठे महीने के पांचवें दिन इतिहास के पन्नों पर देश-दुनिया की अन्य घटनाएं दर्ज की गई है। जिसे ज्यादातर लोग नहीं जानते है। सबसे पहले तो आपको बताते है कि 5 जून को विश्व में पर्यावरण के रूप में मनाया जाता है। दरअसल पर्यावरण दिवस की शुरुआत 1972 में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम से हुई थी। इसी दिन यहां पर दुनिया का पहला पर्यावरण सम्मेलन का आयोजन किया गया था। स्वीडन के इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की भी नींव पड़ी और विश्व पर्यावरण मनाने का संकल्प लिया गया। इस सम्मेलन में भारत की ओर से तात्कालिक प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भाग लिया था। इसी दिन से 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाया गया था। ...

WORLD ENVIRONMENT DAY: जानें 5 जून को ही क्यों मनाया जाता है पर्यावरण दिवस

WORLD ENVIRONMENT DAY: जानें 5 जून को ही क्यों मनाया जाता है पर्यावरण दिवस

नई दिल्ली: पिछले कुछ दशकों से पूरा विश्व आधुनिकता की दौड़ में भाग रहा है। आधुनिक बनने की होड़ में प्रत्येक देश पर्यावरण को क्षति पहुंचा रहा है। पर्यावरण दिवस की शुरुआत 1972 में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम से हुई थी। इसी दिन यहां पर दुनिया का पहला पर्यावरण सम्मेलन का आयोजन किया गया था। स्वीडन के इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की भी नींव पड़ी और विश्व पर्यावरण मनाने का संकल्प लिया गया। इस सम्मेलन में भारत की ओर से तात्कालिक प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भाग लिया था। इसी दिन से 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाया गया था। ...

आज का इतिहास: ऑस्कर पुरस्कार से सम्मानित इस एकेडेमी की हुई थी स्थापना, पहले ग्रैमी अवॉर्ड का किया गया था आयोजन

आज का इतिहास: ऑस्कर पुरस्कार से सम्मानित इस एकेडेमी की हुई थी स्थापना, पहले ग्रैमी अवॉर्ड का किया गया था आयोजन

नई दिल्ली: आज का दिन यानी 4 मई देश-दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुई है जो इतिहास के पन्नों पर अपना नाम दर्ज करवाया है। बता दें कि आज ही के दिन यानी 4 मई को ब्रिटेन में ही नहीं बल्कि पूरे यूरोप की पहली महिला प्रधानमंत्री मार्गेरेट थैचर को दुनिया में आयरन लेडी के तौर पर जाना गया था। उन्हें चार मई के दिन ही ब्रिटेन की प्रधानमंत्री चुना गया था। वहीं लंदन डेली मेल का पहला संस्करण चार मई को ही प्रकाशित हुआ था और आस्कर पुरस्कार देने वाली मोशन पिक्चर्स आटर्स अकैडमी की स्थापना भी अमेरिका में चार मई के दिन ही हुई थी। ...

विश्व में क्यों मनाया जाता है आक्रामकता का शिकार हुए मासूम बच्चों का अंतरराष्ट्रीय दिवस, जानें

विश्व में क्यों मनाया जाता है आक्रामकता का शिकार हुए मासूम बच्चों का अंतरराष्ट्रीय दिवस, जानें

साल के अधिकतर दिनों में हम कोई न कोई दिवस जरूर मनाते है। ये अधिकतर स्वास्थ्य, पर्यावरण या फिरकमजोर तबके के लिए होते हैं। कुछ दिवस बच्चों से संबंधित होते है। जिनमें एक है आक्रामकता का शिकार हुए मासूम बच्चों का अंतरराष्ट्रीय दिवस है। पूरे विश्व में 4जून को आक्रमण के शिकार हुए मासूम बच्चों का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाते हुए देश एवं दुनिया के मासूम बच्चे जो शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और घरेलू शोषण का शिकार हुए हैं, उन्हें उनके कानूनों के प्रति जागरूक किया जाता है एवं उनकी खुशहाल जिन्दगी को सुनिश्चित किया जाता है। ...

आज का इतिहास: पद्म भूषण..ऑस्कर अवार्ड से सम्मानित सत्यजीत रे का हुआ था जन्म, महान चित्रकार लिओनार्दो दा विंची कह गए थे दुनिया को अलविदा

आज का इतिहास: पद्म भूषण..ऑस्कर अवार्ड से सम्मानित सत्यजीत रे का हुआ था जन्म, महान चित्रकार लिओनार्दो दा विंची कह गए थे दुनिया को अलविदा

नई दिल्ली: साल के छटे महीने के दूसरा हर दिन इतिहास के पन्नों पर अपनी खास पहचान रखता है। आज के ही दिन भारतीय सिनेमा जगत के बेहतरीन निर्माता, निर्देशक का जन्म हुआ था। बता दें कि 2 मई 1921 को लेखक सत्यजीत रे का जन्म हुआ था। वह एक सफल निर्देशक, लेखक होन के साथ-साथ कलाकार, चित्रकार, फिल्म निर्माता, गीतकार और कॉस्ट्यूम डिजाइनर भी थे। उन्होंने फिल्म जगत को पाथेर पांचाली, अपराजितो, अपूरसंसार और चारूलता जैसी कई यादगार फिल्में दी हैं। उन्होंने अपने जीवन में कुल 37 फिल्में बनाई थीं, जिनकी वजह से वह पूरी दुनिया में छा गए। ...

आज का इतिहास: शाही परिवार के सदस्यों की हुई थी नृशंस हत्या, विस्फोट से 40 लोगों ने गंवाई थी अपनी जान

आज का इतिहास: शाही परिवार के सदस्यों की हुई थी नृशंस हत्या, विस्फोट से 40 लोगों ने गंवाई थी अपनी जान

नई दिल्ली: साल के छठे महीने का पहला दिन इतिहास में अपनी एक खास जगह रखता है। बता दें कि नेपाल में आज के दिन की एक बड़ी घटना घटित हुई थी। जिसने देश के पूरे इतिहास का रूख मोड़ दिया था। इस दिन नेपाल के राजमहल में एक सामूहिक हत्या कांड हुआ था। जिसमें राजा, रानी, राजकुमार और राजकुमारियां की हत्या कर दी थी। जिसके बाद राजा के भाई ज्ञानेंद्र बीर बिक्रम शाह देश के नये राजा बने थे। ...

आज का इतिहास:  कांग्रेस के ध्वज  को किया गया था संशोधित, 50 हजार से अधिक लोगों की हो गई थी मौत

आज का इतिहास: कांग्रेस के ध्वज को किया गया था संशोधित, 50 हजार से अधिक लोगों की हो गई थी मौत

नई दिल्ली: आज का दिन साल के पांचवें महीने का अंतिम दिन है। आज के दिन का इतिहास बहुत सी महत्वपूर्ण घटनाओं पर आधारित है। बता दें कि आज ही के दिन यानी 31 मई को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के झंडे को स्वीकृत किया गया था। महात्मा गांधी ने 1921 में 31 मई के दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ध्वज को स्वीकृत और संशोधित किया था। यह मूल रूप से आंध्र प्रदेश के एक व्यक्ति द्वारा डिजाइन किया गया था। ...

अगर आपको दिखना है दूसरों से अलग, तो फॉलो करें ये टिप्स

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नई दिल्ली: आज के समय में ऐसा कुछ नहीं है जिसकी कॉपी नहीं होती हो। कपड़ों से लेकर हर एक चीज की कॉपी की जाती है। लेकिन जीवन में आगे बढ़ने के लिए नए-नए चैलेंजेस लेने पड़ते हैं। अपने जिम्मेदारी समझनी पड़ती है। तभी आपकी एक अलग पहचान बनती है। ...

दुकानों और घरों के बाहर क्यों लटकाए जाते हैं नींबू-मिर्च, जानें क्या है इसका साइंटिफिक रीजन

दुकानों और घरों के बाहर क्यों लटकाए जाते हैं नींबू-मिर्च, जानें क्या है इसका साइंटिफिक रीजन

नई दिल्ली: अक्सर आपने देखा होगा कि कई लोग अपनी दुकानों, वाहनों और घरों के गेट के बाहर नींबू और मिर्च लटकाकर रखते हैं। कुछ लोग इसे अंधविश्वास भी मानते हैं तो कुछ लोग इन्हें प्रथाओं को अपने विकास और परेशानियों से बचने के लिए अपनाते भी है और कुछ लोग अपने दुकान के दरवाजे पर तो कुछ लोग अपने बन रहे नए घर के दरवाजे पर बुरी शक्तियों से बचने के लिए लगाते है। लेकिन क्या आपको इसकी असली वजह जाते है। तो चलिए आज हम इसी पर बात करेंगे कि क्यों लटकता है नींबू-मिर्च?इस बारें में क्या कहते है सांइस? ...