Silent Killer के है ये कैंसर, जानें इसके लक्षण और बचाव

Silent Killer के है ये कैंसर, जानें इसके लक्षण और बचाव

नई दिल्ली: ट्यूमर बॉडी में दो तरह के होते है। एक कैंसर और दूसरी नॉन कैंसर। कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़कर एक ट्यूमर बना देती है। इसकी बायोप्सी कराने पर ही इसकी पहचान हो पाती है कि यह कैंसर वाली गांठ है या नॉन कैंसर वाली। यह बॉडी में कहीं भी हो सकता है। कैंसर की विशेष बात यह है कि शुरूआत में इसकी पहचान बड़ी मुश्किल से हो पाती है। ऐसा ही एक और कैंसर है, जिसे Silent Killer के नाम से जाना जाता है। आज हम आपको इस कैंसर के बारे में बताने वाले है।

फेफड़ों का कैंसर होता साइलेंट किलर

डॉक्टरों के मुताबिक, जब इसकी शुरुआत फेफ़ड़ों की कोशिकाओं में होती है, तब इसे फेफड़ों का कैंसर या लंग कैंसर (Lung Cancer)कहा जाता है। यह कैंसर धीरे धीरे व्यक्ति की जान ले लेता है, इसलिए इसे साइलेंट किलर कहा जाता है। इसके होने का मुख्य कारण धूम्रपान है. जल्दी जांच होने पर व्यक्ति लंबे समय तक जीवन जी सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 15% फेफड़े के कैंसर का शुरुआती स्तर पर इलाज किया जा सकता है। यहां भी 5 साल तक जिंदा रहने का रेट लगभग 54% है। फेफड़े के कैंसर के लगभग 70% रोगी शुरुआती चरण में ट्रीटमेंट के बाद  थोड़ा अधिक जी लेते है। ट्यूमर के अन्य अंगों में फैल जाने पर यानि चौथे स्टेज में आने पर पांच साल तक जीवित रहने की दर घटकर केवल 4 प्रतिशत रह जाती है।

जरूरी नहीं सिगरेट पीते हो

अधिकतर मामलों में फेफड़े के कैंसर का प्रमुख कारण सिगरेट पीना पाया गया है या फिर बीड़ी व अन्य तरह की स्मॉकिंग करना भी कैंसर होने का बड़ा कारक है। हालांकि, आजकल लंग कैंसर उन लोगों में भी देखा जा रहा है, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया है। फेफड़ों के कैंसर के कोई विशिष्ट शुरुआती लक्षण नहीं होते हैं।लंग कैंसर का सबसे सामान्य लक्षण खांसी है, जो धीरे धीरे गंभीर होती जाती है और कभी ठीक नहीं होती है। दवा खाने पर थोड़ा आराम मिलता है। फिर शुरू हो जाती है। बाद में फेफड़ों पर सूजन आना, खांसने पर खून आना, सांस लेने में तकलीफ और दर्द भी इसके सिम्पटम्स हैं। अगर ट्रीटमेंट की बात करें तो सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियेशन थेरेपी शामिल है।

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