
नई दिल्ली: पंजाबी गायक और कांग्रेस नेता सिद्धू मूसेवाला, जिनकी रविवार 29 मई शाम मानसा जिले में हत्या कर दी गई थी। सिद्धू मूसेवालासंघ 424 वीआईपी शामिल थे, जिनकी सुरक्षा भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने वापस ले ली थी। वीआईपी कल्चर पर नकेल कसने के लिए आप सरकार की कवायद के तहत 28 वर्षीय गायक की सुरक्षा कम कर दी गई थी।इसी कड़ी में एक चौका देने वाली खबर सामने आ रही हैसिद्धू मूसेवाला की हत्या से एक दिन पहले यानी 28 मई को कनाडा से शूटर्स को कॉल आया था। कॉल पर सिद्धू मूसेवाला की सुरक्षा हटाने की जानकारी दी गई थी और वारदात को तुरंत अंजाम देने का आदेश भी दिया गया था।
आपको बताते हैं कि आखिर किसने कनाडा से शूटर्स को कॉल किया था और मूसेवाला की हत्या से एक दिन पहले क्या-क्या हुआ था। 28 मई को सुबह ठीक 11 बजे कनाडा से गोल्डी बराड़ का फोन प्रियव्रत फौजी के मोबाइल पर आता है। खबरों के मुताबिक गोल्डी ने शूटर को यह निर्देश दिए,गोल्डी- हैलो फौजी... सुन, मूसेवाला की सुरक्षा हटा ली गई और अब तुझे बाकी लड़कों के साथ कल ही यानी 29 मई को हर हाल में काम को अंजाम देना है। फौजी- जी डॉक्टर साहब, काम हो जाएगा। मेरी टीम तैयार है।
आगे की कहानी...
आगे की कहानी हम आपको बताएं, उसके पहले आपको बता दें कि गोल्डी बराड़ का गैंग उसे नाम या भाई नहीं, बल्कि डॉक्टर कहकर बुलाती है।
29 मई: सुबह 10 बजे...प्रियव्रत फौजी, अंकित और केशव हरियाणा के कीरमारा इलाके में ठहरे थे. यहां तीनों के ठहरने की जगह नवदीप नाम के एक शख्स ने अरेंज कराई थी। यहां से तीनों मानसा के लिए बलेरो से निकल गए।
29 मई: सुबह 10.30 बजे... प्रियव्रत, अंकित और केशव ने दीपक मुंडी और कशिश को हरियाणा हिसार के ओक्लाना मंडी से अपने साथ ले लिया। दीपक और कशिश राजेंद्र नाम के एक शख्स के ठिकाने पर ठहरे थे।
29 मई: सुबह 11.30 बजे...ओक्लाना से पांचों आरोपी मानसा के लिए निकले। गोल्डी यानी डॉक्टर प्रियव्रत और मनप्रित मानू को फोन करता है और कहता है कि तुम सब मानसा के तीन किलोमीटर पहले एक ढाबे पर पहुंच जाना।
29 मई: शाम 4 बजे... गोल्डी बराड़ के कहने पर मानसा के तीन किलोमीटर पहले एक ढाबे पर शूटर्स पहुंच जाते हैं। ठीक 15 मिनट बाद पंजाब के दोनों कुख्यात शूटर्स मनप्रित मानू और जगरूप रूपा भी उसी ढाबे पर पहुंच जाते हैं। यहां सभी गोल्डी के अगले आदेश का इंतजार करने लगते हैं।
29 मई: शाम 4.30 बजे...गोल्डी ने फिर शूटर्स को फोन किया। गोल्डी ने शूटर्स से कहा कि सुनो, सिद्धू के घर का बड़ा गेट खुल गया है और तुमलोग जल्दी उसके घर के लिए निकलो। सिद्धू बाहर निकलने वाला है।
जवाब में शूटर्स कहते हैं...जी डॉक्टर साहब, तुरंत निकल रहे हैं। इसके बाद तेज रफ्तार से शूटर्स की दोनों गाड़ियां सिद्धू मूसेवाला के घर की ओर निकल जाती हैं। केवल केशव उसी ठाबे पर रुक जाता है. प्लान के मुताबिक, हत्याकांड के बाद सभी को उसी ठाबे पर मिलना था।
शूटर्स की बलेरो कार मानसा गांव के पहले मानसा चौक पर ही रुक गयी। गोल्डी ने फिर शूटर्स को फोन किया और कहा कि मूसेवाला घर से निकल गया है। ब्लैक कलर की गाड़ी में बिना सुरक्षा के, जल्दी जाओ। शूटर्स कहते हैं... जी डॉक्टर साहब।
कुछ ही देर में मूसेवाला की थार ने शूटर्स की बलेरो को क्रॉस किया। फिर शूटर्स की गाड़ी मूसेवाला के पीछे लग गई। मानसा चौक पर खड़ी दूसरी गाड़ी ने भी मूसेवाला की थार को फॉलो करना शुरू किया। एक वक्त शूटर्स को लगा जिस तरह रैकी के वक्त मूसेवाला जिस नहर के रूट्स का इस्तेमाल घर से निकलकर आगे जाने के लिए करता था, 29 मई को भी वही रूट लेगा, लेकिन उस रोज नहर रूट न लेकर मूसेवाला जवाहर की ओर निकल गया। फिर अगले ही कुछ सेकंडों में मूसेवाला की हत्या को अंजाम दे दिया गया। मूसेवाला शूटआउट की ये कहानी खुद दिल्ली पुलिस ने कैमरे पर बताई है।
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