क्यों श्री कृष्ण को करनी पड़ी थी 16 हजार कन्याओं से शादी, भगवत गीता में दिया है उल्लेख

क्यों श्री कृष्ण को करनी पड़ी थी 16 हजार कन्याओं से शादी, भगवत गीता में दिया है उल्लेख

नई दिल्ली: भगवान श्रीकृष्ण और राधा का अलौकिक प्रेम जगजाहिर है, लोग उनके पवित्र प्रेम की मिसाल देते है। लेकिन यह भी सच है कि श्रीकृष्ण को सिर्फ राधा ही नही बल्कि हर वो इंसान प्रिय है जो उन्हें सच्चे दिल से पुकारता है। फिर चाहे वो मीरा हो, द्रोपदी हो या फिर गोपी। वही श्रीमद्भागवत गीता में श्रीकृष्ण की तमाम लीलाओं का वर्णन किया गया है, जिसमें से उनकी एक लीला यह भी थी कि उन्हें एक साथ 16 हजार कन्याओं से विवाह करना पड़ा था। वहीं आज हम आपको उनकी इस ही लीला से जुड़ी कुछ दिलचस्प कहानी बताने वाले है।

दरअसल,कथाओं के अनुसार द्रवापर युग में एक राक्षस ने 16 हजार कन्याओं को कैद कर लिया था। बताया जाता है कि नरकासुर नाम के राक्षस ने अमरत्व पाने के लिए 16 हजार कन्याओ की बलि देने के लिए कैद किया था। वही जब यह बात भगवान श्रीकृष्ण को पता चली तो वो राक्षस की नगरी जा पहुंचे थे और सभी कन्याओं को छुड़ाकर उनसे विवाह रचा लिया। अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि प्रेमिका राधा और 8 पटरानियां होने के बावजुद भगवान ने 16 हजार कन्याओ से विवाह क्यों किया था? बता दें कि,भगवत गीता के अनुसार प्रागज्योतिषपुर नगर के राजा नरकासुर नामक दैत्य ने अपनी मायाशक्ति से इंद्र, वरूण, अग्नि, वायु आदि सभी देवताओं को परेशान कर रखा था। वह संतों को भी त्रास देने लगा था। उसने राज्यों की राजकुमारियों और संतों की स्त्रियों को भी बंदी बना लिया था। जब उसका अत्याचार बहुत बढ़ गया तो देवता व ऋषि मुनि भगवान श्रीकृष्ण की शरण में गए। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें नराकासुर से मुक्ति दिलाने का आश्वसान तो दे दिया लेकिन इस राक्षस को स्त्री के हाथों मरने का श्राप था।

इसलिए श्रीकृष्ण राक्षस का संहार करने के लिए अपनी पत्नी सत्यभामा को सारथी बनाकर ले गए और उसका वध कर सभी कैद कन्याओं को मुक्त कराया। तभी ये सभी 16 कन्याएं श्रीकृष्ण से कहने लगीं कि आपने हमें मुक्त तो कराया लेकिन अब हम जाएंगे कहां क्योंकि इस राक्षस ने हमारे परिजनों को पहले मार दिया है। इनमें से कुछ कन्याओं के परिजन जिंदा थे जो उन्हें चरित्र के नाम पर अपनाने से इंकार कर रहे थे। तब भगवान ने इन सभी कन्याओं की व्यथा सुनी और सभी से एक साथ विवाह रचाया। इस दौरान भगवान ने एक साथ 16 हजार रूप रखे थे।

 

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