SHRADDHA MURDER CASE : पुलिस को मिली नार्को टेस्ट की अनुमति, अब जल्द सामने होंगे हत्या के राज

SHRADDHA MURDER CASE : पुलिस को मिली नार्को टेस्ट की अनुमति, अब जल्द सामने होंगे हत्या के राज

नई दिल्ली: श्रद्धा हत्याकांड को सुलझाने के लिए दिल्ली और मुबंई पुलिस जुटी हुई है फिलहाल पुलिस आरोप के साथ छतरपुर के जंगल में शव के टुकड़े ढुंढने में जुटी है। इस दौरान कोर्ट से एक फैसला आया है जिसमें आरोपी का नार्को टेस्ट करने की अनुमति मिली है। दरअसल पुलिस ने कोर्ट से अनुमति मांगी थी कि आरोपी सच को घुमा रहा है इसलिए कोर्ट नार्टो टेस्ट की अनुमति दे दे जो अब कोर्ट से मिल गई है।बता दें कि अभी तक श्रद्धा के 13 शव के टुकड़े मिल चुके है और पुलिस आगे की जांच कर रही है अब आरोपी का नार्को टेस्ट करेगा और सच का पता लगाएंगी।

   क्या है नार्को टेस्ट

दरअसल नार्को टेस्ट के जरिये किसी अपराधी से सच उगलवाने की पूरी संभावना रहती है।बता दें कि कई आरोपी क्राइम करने के बाद ठीक से सच नहीं बताता है जिसके बाद सच को सामने रखने के लिए पुलिस को इस टेस्ट का सहारा करता है। इसके जरिये व्यक्ति को ट्रुथ ड्रग नाम से आने वाली एक साइकोएक्टिव दवा दी जाती है। कई मामलों में सोडियम पेंटोथोल का इंजेक्शन लगाया जाता है। खून में ये दवा पहुंचते ही व्यक्तिा अर्धचेतना की अवस्था में पहुंच जाता है। उस व्यक्ति से अर्धमूर्छित अवस्था में टीम अपने पैटर्न से सवाल करती है।

आरोपी की होता है पहले टेस्ट

बता दें कि नार्को टेस्ट करने से पहले व्यक्ति का फिजिकल एग्जामिन यानी कि शारीरिक परीक्षण जरूरी होता है। इसमें ये चेक किया जाता है कि अमुक व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित तो नहीं है। बुजुर्ग, दिमागी रूप से कमजोर, नाबालिग या गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों में ये टेस्ट एप्लाई नहीं किया जाता है।

ध्यान से दी जाती है दवा

कई बार दवाई के अधिक डोज के कारण यह टेस्ट फेल भी हो जाता है। इससे व्यक्तिस अधिक बेहोशी की स्थि‍ति में भी चला जाता है, जिससे वो जवाब देने की स्थिाति में नहीं रहता इसलिए विशेषज्ञ इस टेस्ट को करने से पहले कई जरुरी सावधानियां बरतते हैं।

कौन करता है ये टेस्ट

ये टेस्ट फॉरेंसिक एक्सपर्ट, जांच अधिकारी, डॉक्टर और मनोवैज्ञानिक आदि की टीम एकसाथ मिलकर करती है. इस दौरान सुस्त अवस्था में सोच रहे व्यक्ति से सवाल-जवाब घटनाक्रम आदि के बारे में पूछा जाता है. इस दौरान व्यक्ति। में तर्क क्षमता काफी कम होती है, ऐसे में उससे सच उगलवाने की गुंजाइश बढ़ जाती है।

Leave a comment