दुनिया के वो सात अजूबे,जिन्हें देखने के लिए पर्यटकों का लगता है तांता

दुनिया के वो सात अजूबे,जिन्हें देखने के लिए पर्यटकों का लगता है तांता

नई दिल्ली:दुनिया में बहुत सी घुमने की जगह है। वहीं हम अक्सर दुनिया में सात अजुबों के बारे में सुनते है जो दुनिया के अलग अलग देशों में मौजूद है। हालांकि इस सात अजुबों में भारत के ताजमहल का नाम भी शामिल है। लेकिन क्या आपने कभी इन सात अजुबो के बारे में जानने की कोशिश की है। या फिर ये सात अजुबे किन-किन देशों में है? चलिए आज हम आपको इस सात अजुबों के बारे में बताते है और शुरूआत करते है भारत से। 

दरअसल भारत में ताजमहल को सात अजुबों में से एक माना जाता है। जो आगरा में स्थिति है। ताजमहल मुगल सम्राट शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज की याद में सफेद संगमरमर के पत्थर से बनवाया था। प्रेम के प्रतीक ताजमहल का निर्माण 20000कारीगरों ने किया था। कहा जाता है कि ऐसी संरचना दोबारा नहीं बनाई जा सके इसलिए कारीगरों के हाथ कटवा दिए गए थे।

अब बात करते है सात में से दूसरे अजुबे की। जो चीन में मौजूद है। दरअसल चीन का ग्रेट वॉल ऑफ चाइना सात अजूबों में शामिल हैं। जिससे दुनिया की सबसे लंबी और विशाल दीवार से भी जाना जाता है। चीन के पहले शासक किन शी हुआंग ने इसका निर्माण कराया था। करीब 20साल में 21,196किलोमीटर लंबी विशाल दीवार का निर्माण हुआ। इस दीवार के निर्माण का कारण हुआंग ने अपने साम्राज्य की रक्षा के लिए करवाया था। ग्रेट वॉल ऑफ चाइना को पृथ्वी पर सबसे लंबा कब्रिस्तान भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इसे बनाने के लिए 10लाख से ज्यादा लोग मारे गए।

अब बात करते है तीन अजूबे की। दरअसल ब्राजील में 125फीट लंबी क्राइस्ट द रिडीमर स्थित है, जिसे हेटर दा सिल्वा कोस्टा ने डिजाइन किया था। हालांकि इसका निर्माण ब्राजील नहीं, बल्कि फ्रांस में किया गया था। एक पहाड़ की चोटी पर स्थित इस मूर्ति पर बिजली के गिरने का खतरा रहता है। कहा जाता है कि साल में तीन-चार बार बिजली इस मूर्ति से टकरा जाती है।

वहीं मेक्सिको में माया सभ्यता से जुड़ा चौथा अजूबा है। जिसे चिचेन इट्जा के नाम से जाना जाता है। मेक्सिको के इस सबसे संरक्षित पुरातात्विक स्थल का इतिहास 1200साल से भी अधिक पुराना है। कहा जाता है कि 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच पूर्व-कोलंबियाई माया सभ्यता के लोगों ने चिचेन इट्जा का निर्माण कराया ता। यहां कई पिरामिड, मंदिर, खेल के मैदान और कॉलम बनाए गए हैं। चिचेन इट्जा की खास बात है कि यहां असामान्य आवाजें सुनाई देती हैं।

वहीं इटली शहर में बने कालीजीयम को दुनिया के सात अजूबों में से एक माना जाता है। कालीज़ीयम का निर्माण सम्राट टाइटस वेस्पेशियन ने 70ईसवी और 82ईसवी के बीच कराया था। निर्माण में करीब 9साल लगे। रोम के कालीज़ीयम को दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित और प्राचीन एम्फीथिएटर माना जाता है। कहते हैं कि इस एम्फीथिएटर के अंदर करीब चार लाख लोग मारे गए थे।

इसके अलावा दक्षिण अमेरिकी देश पेरू का माचू पिच्चू सात अजूबों में से एक है। इंका सभ्यता से संबंधित यह ऐतिहासिक स्थल 'इंकाओं का खोया हुआ शहर' कहा जाता है। माचू पिच्चू को पेरू का एक एतिहासिक देवालय भी माना जाता है। 1983में यूनेस्को ने माचू पिच्चू को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया था।वहीं जॉर्डन में पेट्रा नाम का एक ऐतिहासिक नगर बसा है, जिसका निर्माण गुलाबी रंग के बलुआ पत्थरों से हुआ है। अपने रंग के कारण पेट्रा को रोज सिटी भी कहा जाता है। यह दुनिया के सात अजूबों में से है। पेट्रा में कई मकबरे और मंदिर स्थित हैं।

 

 

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