
SAWAN 2023: सावन मास को हिन्दू पंचांग में एक पवित्र मास माना जाता है और यह मास भगवान शिव को समर्पित होता है। सावन मास में कार्तिक मास की तरह शिव जी की पूजा का महत्व है। शिव पूजा का विशेष महत्व रखता है जब हम इस दिन मौन रहकर उनकी पूजा करते हैं।
सावन में रखी जाती है मौन पूजा
शिव जी को सावन में पूजने का कारण उनकी विशेष प्रसन्नता है। इस मास में भगवान शिव ने सावन और भक्ति का व्रत रखकर मानवता की सेवा की थीं। सावन के महीने में भक्त रात्रि को जागरण करते हैं, अपने मनोकामनाएं मांगते हैं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। मौन रहकर पूजा करने से हम अपने मन को शुद्ध करके उनकी आराधना करते हैं और अपने विचारों को संयमित करके उनके ध्यान में रहते हैं।
पूजा में शामिल करें ये चीजें
मौन रहकर की जाने वाली शिव पूजा से भक्त को शांति, शुद्धता, और मनोयोग मिलता है। यह पूजा हमें शिव जी के साथ अंतरंग होने का अनुभव कराती है और हमें दिव्यता का अनुभव होता है। इसके अलावा, मौन रहकर शिव पूजा करने से मानसिक और आध्यात्मिक विकास होता है और मन को नियंत्रित करने की क्षमता में सुधार होता है।
सावन में मौन रहकर की जाती है शिव जी की पूजा ताकि हम शारीरिक और मानसिक शुद्धता प्राप्त करें, अपने आप को शिव जी की आनंदमयी अनुभूति में ले जाएं और अपनी भक्ति और साधना को मजबूत करें। यह पूजा हमें संयम, ध्यान, और साधना की भावना को प्राप्त करने में मदद करती है और हमारे जीवन में शांति और समृद्धि का आदान करती है।
इस दिन रखी जाती है मौन पूजा
मौन पूजा, जिसे शिव मौनी अमावस्या भी कहा जाता है, सावन मास की अमावस्या तिथि को की जाती है। सावन मास का चंद्रमा प्रतिमान से जब अमावस्या होता है, उस दिन मौन पूजा का आयोजन किया जाता है। यह पूजा सावन मास के अंतिम दिन में होती है, जब सावन मास की पूर्णिमा से एक दिन पहले अमावस्या होती है। यदि हम वर्ष 2023 की बात कर रहें हैं, तो सावन मौनी अमावस्या 6 अगस्त 2023, रविवार को होगी। इस दिन मौन पूजा का आयोजन किया जाएगा।
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