
SA vs NZ David Miller: क्रिकेट का विश्व कप जीतना हर खिलाड़ी का सपना होता है। जिसके लिए खिलाड़ी कड़ी मेहनत भी करते हैं, लेकिन मेहनत के साथ-साथ एक खिलाड़ी के सफर में किस्मत का भी एक अहम रोल माना जाता है। अगर आपकी किस्मत खराब हो, तो आप कितनी ही मेहनत कर लो, चाहे आपके अंदर जबरदस्त टैलेंट हो, लेकिन अगर आपकी किस्मत आपसे रूठी हो तो आप चैंपियन बन सकते। ऐसा ही कुछ दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ी डेविड मिलर के साथ देखने को मिल रहा है।
डेविड मिलर के पास पिछले 13 साल में 12 बार ऐसे मौके आए, जब उन्होंने और उनकी टीम पूरा दम लगाया, लेकिन ट्रॉफी नहीं जीत सकें। विश्व क्रिकेट में मिलर को 'किलर मिलर' का नाम मिला हुआ है। जैसे ही वह मैदान पर उतरते है तो गेंदबाजों के पसीने छूट जाते हैं। लेकिन इस शानदार बल्लेबाज की किस्मत इनसे रूठी हुई है। किस्मत ने इसके साथ ऐसा मजाक किया है कि आज तक को भी आईसीसी (ICC) ट्रॉफी अपने नाम नहीं कर पाए हैं। बीती रात टी20 विश्व कप में भी कुछ ऐसा देखने को मिला। टी20 विश्व कप के एक बार फिर सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के हाथों में दक्षिण अफ्रीका को हार झेलनी पड़ी। जिसके बाद चोकर के तमगे ने इस जख्म को और हरा कर दिया। साथ ही डेविड मिलर के सपने को और लंबा कर दिया। जो सपना साल 2013 से शुरू हुआ था।
करो या मरो के मुकाबले में बिखरी साउथ अफ्रीका
साल 2010 से डेविड मिलर इंटरनेशनल क्रिकेट में अपना दम दिखा रहे हैं। उन्हें साल 2013 में पहली बार आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीतने का मौका मिला था। लेकिन वह जीत नहीं पाए। इसके बाद 2013 से लेकर 2026 टी20 विश्व कप तक मिलर ने कुल 12 आईसीसी टूर्नामेंट में शिरकत की है। लेकिन किसी भी टूर्नामेंट को अपने नाम नहीं कर पाए। हर बार की तरह कागजों में दक्षिण अफ्रीका की टीम सबसे मजबूत दिख रही थी। जिसके हिसाब से उन्होंने सेमीफाइनल से पहले शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन जैसे ही ‘करो या मरो’ का मुकाबला आया तो टीम पूरी तरह से बिखर गई। इस टूर्नामेंट में मिलर ने बतौर बल्लेबाज शानदार प्रदर्शन किया।
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