भारत के तीन रहस्यमयी मंदिर जहां होती है कई अविश्वसनीय घटनाएं, जानें इतिहास

भारत के तीन रहस्यमयी मंदिर जहां होती है कई अविश्वसनीय घटनाएं, जानें इतिहास

नई दिल्ली: भारत को एक प्राचीनतम सभ्यता वाला सांस्कृतिक देश माना जाता है। यहां के रहस्मय मंदिरों को देखने के लिए विश्व के कोने-कोने से पर्यटक पहुंचते है। इसके अलावा भारत की प्राचीनतम मंदिरों की बनावट, विशेषता, महत्व और इतिहास आदि जानने के लिए ही पर्यटक बार-बार भारत की ओर रूख करते है। वहीं आज हम आपको देश के कुछ ऐसे मंदिरों के बारे में बताने वाले है जो आज भी रहस्यों के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है।

वेंकटेश्वर मंदिर, आंध्र प्रदेश

इस लिस्ट में सबसे पहला नाम आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में सत्थि वेंकटेश्वर मंदिर का आता है। इस मंदिर में मौजूद भगवान वेंकटेश्वर को तिरूपति के रूप में भी जाना जाता है जो देश के सबसे मशहूर मंदिरों में शुमार है। ऐसा माना जाता है कि भगवान वेंकटेश्वर यहां मूर्ती के रूप में धारण हुए थे, जिसकी वजह से इस मंदिर की स्थापना यहां की गई। आपको बता दें, इस मंदिर में दो विशाल हॉल हैं, जहां रोजाना 1200 से अधिक तीर्थ यात्रियों के बाल कटते हैं। आपको जानकार हैरानी होगी कि यहां सालभर में लगभग 75 टन तक बाल पहुंच जाते हैं। इन बालों को बेचकर तिरुपति मंदिर की 6.5 मिलियन से अधिक कमाई होती है। ये हैं भारत के 7 मोक्ष प्राप्ति तीर्थस्थल है और इन शहरों की यात्रा करने से इंसान को मिलता है मोक्ष।

स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर, गुजरात

गुजरात में मौजूद स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर भारत के अविश्वसनीय और रहस्यमय मंदिरों में आता है। ऐसा कहा जाता है कि ये मंदिर दिन में कुछ समय के लिए पूरी तरह से गायब हो जाता है। गायब होने के बाद इस मंदिर का एक भी हिस्सा दिखाई नहीं देता। ये मंदिर गुजरात में अरब सागर और कैम्बे की खाड़ी के तट के बीच मौजूद है और हाई टाइड के दौरान ये मंदिर रोजाना पानी में डूब जाता है और हाई टाइड का स्तर नीचे जाने पर ये मंदिर फिर से ऊपर आ जाता है। ऊपर आने के बाद, फिर इस मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। प्रकृति के इस असाधारण नजारे को देखने के लिए यहां हजारों में भीड़ जमा हो जाती है।

ब्रह्मा मंदिर पुष्कर राजस्थान

इस लिस्ट में तीसरा नाम राजस्थान में स्थित ब्रहमा मंदिर का आता है। जहां भगवान ब्रह्मा की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा मंदिर 2000 साल पुराना है, जिसे 14 वी शताब्दी में बनाया गया था। इसे आदि शंकराचार्य और ऋषि विश्वामित्र द्वारा निर्मित किया गया था।

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