
Adhai Din Ka Jhonpra:अजमेर शरीफ दरगाह के पास स्थित ऐतिहासिक मस्जिद 'अढ़ाई दिन का झोपड़ा' को उसके इस्लाम-पूर्व मूल रूप में बहाल करने की मांग फिर से उठ रही है। हाल ही में एक स्थानीय अदालत में दायर याचिका ने इस विवाद को नया मोड़ दिया है।
क्या 'अढ़ाई दिन का झोपड़ा' का इतिहास?
अढ़ाई दिन का झोपड़ा, जो अजमेर दरगाह से कुछ ही दूरी पर स्थित है, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित किया गया है। अजमेर के उप महापौर नीरज जैन ने दावा किया कि ऐतिहासिक साक्ष्य से यह साबित होता है कि यह स्थल पहले एक संस्कृत महाविद्यालय और मंदिर था, जिसे आक्रांताओं ने ध्वस्त कर दिया।
नीरज जैन ने कहा कि इस संरक्षित स्थल पर अवैध गतिविधियां चल रही हैं और पार्किंग क्षेत्र में अतिक्रमण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एएसआई को इस स्थल पर रखी मूर्तियों को बाहर निकालकर एक संग्रहालय बनाना चाहिए और इसके इस्लाम-पूर्व इतिहास का संरक्षण करना चाहिए।
क्या ये स्थल कभी हिंदू मंदिर था?
इस स्थल के बरामदे में रखी गई मूर्तियां, जो 11वीं-12वीं शताब्दी की हैं, यह दर्शाती हैं कि यहां पहले एक हिंदू मंदिर का अस्तित्व था। 'अढ़ाई दिन का झोपड़ा' का नाम इस कारण पड़ा क्योंकि यहां ढाई दिन का मेला आयोजित होता था।
इस साल मई में, जैन मुनियों का एक समूह विश्व हिंदू परिषद के नेताओं के साथ इस स्थल का दौरा करने गया था। इसके बाद अजमेर दरगाह के 'अंजुमन' सचिव ने सोशल मीडिया पर आपत्ति जताई और जैन मुनियों के बिना कपड़ों के स्मारक में प्रवेश करने पर विरोध किया।
अदालत में मामला
हाल ही में हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने दरगाह समिति और एएसआई के खिलाफ याचिका दायर की। इसमें दावा किया गया कि दरगाह असल में एक शिव मंदिर था, जिसे बाद में मस्जिद में बदल दिया गया।
यह विवाद अब एक अहम मोड़ पर है, जहां ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से विभिन्न पक्षों की राय अलग-अलग हैं।
Leave a comment