Dussehra 2022: भारत के इस राज्य में गोलियों से छल्ली किया जाता है रावण का सीना

Dussehra 2022: भारत के इस राज्य में गोलियों से छल्ली किया जाता है रावण का सीना

राजस्थान: आज पूरेदेश में वियजदशमी को मनाया जा रहा है। साथ ही रावण दहन की तैयारियों चल रही है। आज शाम को देश के अलग-अलग राज्यों में रावण का दहन किया जाएंगा और ये परंपरा आज से नहीं बल्कि सालों से चली आ रही है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान राम ने रावण का वध कर विजय प्राप्त की थी तभी से ये रावण का दहन की परंपरा चलती आ रही है। हालांकि कई राज्यों में रावण की पूजा भी की जाती है। वहीं रावण के दहन ठीक उसी तरह किया जाता है जिस तरह भगवान राम ने किया था। यानी की राम की भुमिका निभाने वाले व्यक्ति रावण को आग से भरा तीर मारता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे जिले के बारे में बताते है जो तीर से नहीं गोलियों से रावण का अंत किया जाता है।  

125 सालों की पूरानी है परंपरा

दरअसल राजस्थान के झुंझनू जिले के उदयपुरवाटी कस्बे में रावण के दहन को लेकर एक अनोखी परंपरा है। मेवाड़ क्षेत्र में यहां दशहरे के दिन रावण के पुतले के साथ उसकी सेना पर बंदूकों से अंधाधुंध गोलियां बरसाई जाती हैं। पहले सेना पर गोलियां बरसाकर उन्हें खत्म किया जाता है। फिर मशाल बाण से रावण पर गोलियां बरसाई जाती है, उसके बाद पुतले का दहन किया जाता है।वहीं यह परंपरा करीब 125 साल से चली आ रही है। यह परंपरा उदयपुरवाटी के जमात क्षेत्र में बसे दादूपंथी समाज के लोग निभाते हैं। एक अलग तरीके से रावण के अंत को उदयपुरवाटी ही नहीं बल्कि आसपास के गांवों से भी हजारों लोग देखने आते हैं।

मिट्टी के मटकों की बनाई जाती है सेना

रावण की जो सेना होती है, वो मिट्टी के मटके से बने होते हैं। सफेद रंग से पेंट कर उन पर आंखें और मुंह बनाए जाते हैं। फिर इन मटकों को एक दूसरे के ऊपर रखा जाता है। ऐसें में मटकों से बनी सेना रावण के दोनों तरफ बिछी होती है। यहां पहले सेना और फिर रावण को गोलियों को छलनी किया जाता है।

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