Rajathan News:राजस्थान में फर्जी डिग्री के सहारे डॉक्टर बनने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीकरण कराने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें नानजीराम चौधरी भी शामिल है, जिसके बारे में जांच में सामने आया कि वह कथित तौर पर केवल आठवीं कक्षा तक पढ़ा है। इसके बावजूद उसने दसवीं-बारहवीं की अंकतालिकाओं, एमबीबीएस डिग्री और स्त्री रोग एवं प्रसूति विज्ञान से जुड़े डिप्लोमा के दस्तावेजों के आधार पर मेडिकल रजिस्ट्रेशन कराया था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, नानजीराम ने करीब 2010 में रानीवाड़ा के एक निजी डॉक्टर के क्लीनिक में ओपीडी काउंटर पर मरीजों की पर्चियां काटने का काम किया था। बाद में वह कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे डॉक्टर के रूप में पंजीकृत हो गया। पुलिस के अनुसार, वह जालोर जिले के रानीवाड़ा में भास्कर हॉस्पिटल का संचालन कर रहा था। इस मामले ने मेडिकल रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
दूसरे आरोपी पर भी फर्जी MBBS डिग्री का आरोप
इस मामले में गिरफ्तार दूसरे आरोपी पंकज यादव पर भी फर्जी एमबीबीएस डिग्री और अंकतालिका तैयार करवाने का आरोप है। एसओजी की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि इन दस्तावेजों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराया गया था। अधिकारियों ने मामले की जांच के दौरान शैक्षणिक दस्तावेजों और मेडिकल रजिस्ट्रेशन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की। यह मामला केवल फर्जी डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि मेडिकल व्यवस्था में सत्यापन प्रक्रिया की अहमियत भी सामने लाता है।
2024 में दर्ज हुई थी शिकायत, अब गिरफ्तारी
रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार ने 6 अक्टूबर 2024 को जयपुर के अशोक नगर थाने में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीकरण कराने को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। इसी मामले की जांच आगे बढ़ने पर एसओजी ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और मेडिकल रजिस्ट्रेशन हासिल करने में किन अन्य लोगों की भूमिका रही। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाले मुकदमे और साक्ष्यों के आधार पर होगी।
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