Farmers Protest: चंडीगढ़ कूच कर रहे किसानों को रोका गया, अब सड़को पर ही शुरु हुआ धरना-प्रदर्शन

Farmers Protest: चंडीगढ़ कूच कर रहे किसानों को रोका गया, अब सड़को पर ही शुरु हुआ धरना-प्रदर्शन

Farmers Protest in Chandigarh: आज पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ में किसानों का धरना-प्रदर्शन होना है। किसान अपनी मांगों को लेकर पंजाब के किसान संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले चंडीगढ़ की ओर आगे बढ़ रहे हैं। वहीं, पंजाब सरकार ने भीड़ को इकठ्ठा होने से रोक रही हैं। पुलिस ने शहर के सभी एंट्री पॉइंट पर सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया हैं। इस वजह से कई किसान सड़कों पर ही धरने पर बैठ गए हैं। किसानों का कहना है कि पुलिस ने जिस जगह उन्हें रोका, वह वहीं सड़कों पर बैठकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

बता दें, आज सुबह किसान अलग-अलग जिलों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ निकलें। लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया।  जिसके बाद किसान सड़कों पर ही धरना-प्रदर्शन के लिए बैठ गए।

किसान नेताओं पर लिया एक्शन

पंजाब के किसान अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। बीते सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) और पंजाब सरकार के बीच बैठक भी हुई। लेकिन कुछ मुद्दों पर अचानक बहस छिड़ गई। जिसके बाद CM भगवंत मान गुस्से में बैठक छोड़कर ही चले गए। इसके बाद किसानों ने 05मार्च बुधवार यानी आज चंडीगढ़ में धरना देना का ऐलान किया।

वहीं, इस धरना-प्रदर्शन को रोकने के लिए पंजाब पुलिस ने मंगलवार सुबह कई किसान नेताओं पर कार्रवाई करते हुए उनके घर पहुंच गई। इसके बाद पुलिस ने कई किसान नेताओं को गिरफ्तार किया। तो वहीं, कुछ को नजरबंद किया। पुलिस ने अपनी इस कार्रवाई में किसान नेता कुलवंत सिंह को नजरबंद किया और दलजिंदर सिंह हरियाउ को गिरफ्तार किया।

सरवन पंढेर ने क्या कहा?

धरना-प्रदर्शन जारी रखते हुए किसान नेता सरवन पंढेर ने कहा कि आज बुधवार को पूरे पंजाब में सरकार के पुतले जलाएंगे इसी के साथ किसान नेताओं की रिहाई की मांग भी करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे कदमों से हमारी आवाज नहीं दबा सकती।

CM भगवंत मान ने क्या कहा?

सीएम भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि चक्का जाम करना, रेल रोकना किसी समस्या का हल नहीं है। बल्कि इससे आम जनता को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं। इस धरना-प्रदर्शन का असर लोगों के काम पर पड़ रहा हैं। उन्होंने आगे कहा कि बातचीत के लिए दरवाजे हमेशा खुले हैं। लेकिन आंदोलन करना किसी समस्या का हल नहीं है।

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