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एनसीआर का दायरा घटाने का प्रस्ताव खारिज, हरियाणा के 5 जिले फिलहाल रहेंगे शामिल

एनसीआर का दायरा घटाने का प्रस्ताव खारिज, हरियाणा के 5 जिले फिलहाल रहेंगे शामिल

NCR Draft Regional Plan: दिल्ली में 16 जून को हुई 42वीं एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक में एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) का दायरा 100 किलोमीटर तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। यदि यह प्रस्ताव पास हो जाता तो हरियाणा के कई जिले एनसीआर से बाहर हो जाते। फिलहाल एनसीआर की मौजूदा सीमा बरकरार रहेगी।

बैठक में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान एनसीआर के विकास से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। सबसे बड़ा फैसला यह रहा कि एनसीआर के चार राज्यों में "नमो नोड्स" के नाम से चार नए आधुनिक शहर विकसित किए जाएंगे। ये शहर नमो भारत (रैपिड रेल) परियोजना के प्रमुख रूटों के आसपास बसाए जाएंगे।

एनसीआर को चार जोन में बांटने पर सहमति

वर्तमान में एनसीआर 24 जिलों तक फैला हुआ है और इसका क्षेत्र दिल्ली से लगभग 150 से 175 किलोमीटर तक पहुंचता है। प्रस्ताव था कि एनसीआर को दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर के हवाई दायरे तक सीमित कर दिया जाए। हालांकि इस सुझाव को स्वीकार नहीं किया गया। इसके बजाय एनसीआर को चार अलग-अलग जोन में बांटने पर सहमति बनी है।

हरियाणा पर पड़ता सबसे अधिक असर 

इस प्रस्ताव का सबसे अधिक असर हरियाणा पर पड़ता। एनसीआर में हरियाणा के 14 जिले शामिल हैं। यदि नया नियम लागू हो जाता तो राज्य का एनसीआर क्षेत्र 25,327 वर्ग किलोमीटर से घटकर केवल 10,546 वर्ग किलोमीटर रह जाता। यानी लगभग 60 प्रतिशत क्षेत्र एनसीआर से बाहर हो जाता। हरियाणा के करनाल, महेंद्रगढ़, जींद, पानीपत और भिवानी जैसे जिलों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता। करनाल और महेंद्रगढ़ पूरी तरह एनसीआर से बाहर हो सकते थे। जींद की कई तहसीलें भी दायरे से बाहर चली जातीं। पानीपत का कुछ हिस्सा ही एनसीआर में रह पाता, जबकि भिवानी की केवल कुछ नजदीकी तहसीलें शामिल रहतीं।

बैठक में लिया गया फैसला 

जानकारों का मानना है कि एनसीआर क्षेत्र में लागू पर्यावरण और औद्योगिक नियमों के कारण कई विकास परियोजनाएं प्रभावित होती हैं। इसी वजह से कुछ क्षेत्रों को एनसीआर से बाहर करने की चर्चा हुई थी। बैठक में उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने अपेक्षाकृत लचीला रुख अपनाया। उनका सुझाव था कि यदि किसी जिले की कोई तहसील 100 किलोमीटर के दायरे में आती है तो उसे एनसीआर में रखा जाए। फिलहाल प्रस्ताव खारिज होने के बाद संबंधित जिलों को राहत मिली है और वे पहले की तरह एनसीआर का हिस्सा बने रहेंगे। 

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