Pooja Niyam: क्या आप भी पूजा के समय सिर ढकने की करते हैं गलती? जानें क्या कहता है शास्त्र

Pooja Niyam: क्या आप भी पूजा के समय सिर ढकने की करते हैं गलती? जानें क्या कहता है शास्त्र

Pooja Niyam: सनातन धर्म में अक्सर लोग पूजा में बैठते समय अपने सिर पर रूमाल या तौलिया रख लेते हैं। लेकिन शास्त्रों में सिर ढकने का निषेध है ऐसे में लोग कन्फ्यूज रहते हैं कि आखिर करना क्या चाहिए। दरअसल, धर्म शास्त्र में सिर्फ शौच के वक्त ही सिर ढकने की सलाह दी जाती है।

कहते हैं कि ऐसा विधान है कि किसी को प्रणाम करते समय, जप-पूजा ओर हवन करते समय सिर खुला रखना चाहिए। कहते हैं सिर खुला रखने से अभीष्ठ फल की प्राप्ति होती है। इसकी चर्चा विस्तार से कुर्म पुराण में मिलती है। इस पुराण के 13वें अध्याय के नौंवे श्लोक में ये लिखा है कि पूजा की चौक पर बैठते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

पूजा हो जाता है निष्फल

इसमें बताया गया है कि पगड़ी पहनकर, कुर्ता पहनकर, नग्न होकर, शिखा खोलकर, कण्ठ को वस्त्रसे लपेटकर, बोलते हुए या कांपते हुए जप तप या पूजा नहीं करनी चाहिए। इसमें बताया गया है कि जो भक्त ऐसा करते हैं उनकी पूजा निष्फल हो जाती है।

शिव पुराण में भी है उल्लेख

इसके साथ ही पूजा के विधान को शिव पुराण के उमा खण्ड में विस्तार बताया गया है। इसके 14वें अध्याय में कहा गया है कि सिर पर पगड़ी रखकर पूजा में नहीं बैठना चाहिए। इसी तरह से कुर्ता पहनकर, नग्न होकर, खुले बालों के साथ या गले के कपड़ा लपेटकर अपने अराध्य की साधना नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही अशुद्ध हाथों से या सम्पूर्ण शरीर अशुद्ध हो तब भी जप तप नहीं करना चाहिए। कुछ ऐसा ही विधान ‘शब्द कल्पद्रुम’में भी किया गया है।

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