PM मोदी ने प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर ममता बनर्जी पर साधा निशाना, बोले- ये संविधान का अपमान

PM मोदी ने प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर ममता बनर्जी पर साधा निशाना, बोले- ये संविधान का अपमान

Political Controversy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 8 मार्च को दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर लगभग 33,500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और उन्हें जमकर निशाने पर लिया।

द्रौपदी मुर्मू का घोर अपमान- पीएम

पीएम मोदी ने जनसभा में कहा कि आज देश अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा है, लेकिन कल पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार ने देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का घोर अपमान किया। मुर्मू जी संथाल समुदाय के एक बड़े उत्सव में शामिल होने गई थीं, लेकिन उनके सम्मान के बजाय टीएमसी ने कार्यक्रम का बहिष्कार किया।

पीएम ने टीएमसी पर लगाया आरोप

पीएम ने आगे कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू खुद आदिवासी समुदाय से आती हैं और हमेशा उनके विकास के लिए चिंतित रहती हैं। मोदी ने टीएमसी सरकार पर कार्यक्रम को कुप्रबंधन के भरोसे छोड़ने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि यह न केवल राष्ट्रपति का अपमान है, बल्कि भारत के संविधान और लोकतंत्र की परंपरा का भी अपमान है।

क्यों बढ़ा ये विवाद?

वास्तव में यह विवाद राष्ट्रपति मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे के दौरान सामने आया। राष्ट्रपति दार्जिलिंग जिले में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। यह कार्यक्रम मूल रूप से बिधाननगर में आयोजित होना था, जहां बड़ी संख्या में संथाल आदिवासी लोग आसानी से पहुंच सकते थे। लेकिन राज्य प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़भाड़ और अन्य कारणों का हवाला देते हुए इसे बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोशाईपुर में स्थानांतरित कर दिया।

राष्ट्रपति मुर्मू ने जताई नाराजगी

राष्ट्रपति मुर्मू ने स्वयं इस बदलाव पर नाराजगी जताई और कहा कि नया स्थान छोटा था, जिससे कई लोग सम्मेलन में शामिल नहीं हो पाए। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को छोटी बहन बताते हुए सवाल किया कि क्या वो उनसे नाराज हैं, क्योंकि न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री उन्हें रिसीव करने आए। बीजेपी ने इस मुद्दे को लेकर टीएमसी और ममता बनर्जी पर हमला बोला है, जबकि ममता ने सभी आरोपों को खारिज किया और कहा कि राज्य सरकार को इस कार्यक्रम के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। यह विवाद राजनीतिक गलियारों में तेज़ी से चर्चा का विषय बन गया है और देशभर में दोनों पक्षों के बयान सामने आ रहे हैं। 

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