National Handloom Day: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'राष्ट्रीय हथकरघा दिवस' (National Handloom Day) के मौके पर भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत का जश्न मनाया और देश के बुनकरों व कारीगरों को समर्थन देने के सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने इस सेक्टर को ग्रामीण सशक्तिकरण, महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास और 'आत्मनिर्भर भारत' का एक अहम स्तंभ बताया।
'X' पर एक पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन कारीगरों की पीढ़ियों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने भारत की पारंपरिक कारीगरी को संजोकर रखा है। साथ ही, उन्होंने नागरिकों से सोशल मीडिया के ज़रिए इस सेक्टर को बढ़ावा देने का आग्रह भी किया। उन्होंने लिखा कि, "आज, राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर, हम भारत की समृद्ध और जीवंत हथकरघा विरासत का जश्न मना रहे हैं। हम अपने बुनकरों और कारीगरों के कौशल, रचनात्मकता और समर्पण को भी सलाम करते हैं। पीढ़ियों से उन्होंने हमारी परंपराओं को संजोया और समृद्ध किया है। हमारी सरकार हथकरघा सेक्टर का समर्थन करती रहेगी, जो ग्रामीण सशक्तिकरण, महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास और 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को पूरा करने का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।"
पीएम मोदी ने लोगों से #NationalHandloomDay हैशटैग का इस्तेमाल करके अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पादों और ट्रेंडिंग "Get Ready With Me" (GRWM) वीडियो को शेयर करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस पहल से जागरूकता बढ़ाने और पारंपरिक टेक्सटाइल सेक्टर से जुड़े समुदायों को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। "#NationalHandloomDay का इस्तेमाल करके अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पादों और GRWM वीडियो को ज़रूर शेयर करें, इससे इस सेक्टर से जुड़े लोगों का हौसला बढ़ेगा।
कपड़ा मंत्रालय नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र (RBCC) में 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाएगा। इसका मकसद भारत की हथकरघा विरासत को दिखाना और देश के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में हथकरघा बुनकर समुदाय के योगदान को सम्मान देना है।
कपड़ा मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के तौर पर इस समारोह में शामिल होंगी। इस मौके पर केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, कपड़ा राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा, सचिव (कपड़ा) नीलम शमी राव और विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना भी मौजूद रहेंगे।
प्रेस विज्ञप्ति में आगे बताया गया है कि इस कार्यक्रम में संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार पाने वाले लोग अपने परिवार के सदस्यों के साथ, देश भर के हथकरघा बुनकर, पुरस्कार चयन समिति के सदस्य, हथकरघा क्षेत्र से जुड़ी जानी-मानी हस्तियां, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि और अन्य खास मेहमान शामिल होंगे।
समारोह का एक मुख्य आकर्षण 2025 के लिए संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान करना होगा। हथकरघा बुनकरों को उनकी कारीगरी, इनोवेशन और भारत की हथकरघा परंपराओं को बचाने में उनके योगदान के लिए कुल 22 पुरस्कार दिए जाएंगे, जिनमें तीन संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार शामिल हैं।
इस मौके पर भारत की अलग-अलग हथकरघा बुनाई परंपराओं का जश्न मनाने के लिए चार यादगार डाक टिकट भी जारी किए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान दो प्रकाशनों "Earth. Root. Thread - Aal Dyed Handloom Textiles of Central India" और "Handloom Awards Book 2025" का भी अनावरण किया जाएगा।