लड़कियों के लिए गुलाबी और लड़को के लिए नीला रंग ही क्यों चुना जाता है, जानें इसके पीछे का इतिहास

लड़कियों के लिए गुलाबी और लड़को के लिए नीला रंग ही क्यों चुना जाता है, जानें इसके पीछे का इतिहास

नई दिल्ली: अगर आप अपने लिए या किसी बच्चें के लिए कपड़े खरीदने जा रहे है तो एक बार अपके दिमाग में जरुर आएंगा की है कि अगर लड़का है, तो नीले रंग के कपड़े और अगर लड़की है तो गुलाबी रंग के कपड़े लेने चाहिए। यह बिलकुल आम प्रवृत्ति है कि हममें से ज्यादातर लोग लड़कों के लिए नीला और लड़की के लिए गुलाबी या उससे मिलते-जुलते किसी रंग की ही ड्रेस को प्राथमिकता देते हैं।

लेकिन क्या आपने कभी इसके पीछे की असली वजह के बारे में कुछ सोचा है, जिसके आधार पर हमें यह आसानी हुई है। तो क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों है? जेंडर के हिसाब से कपड़ों के रंगों का चुनाव क्यों किया जाता है? शायद इसका जवाब आपके पास नहीं होगा, पर आज हम आपके लिए इसका सही जवाब लेकर आये हैं।

रंगों का इतिहास

जेंडर कलर पेयरिंग पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। लेकिन यह हमारे दीमाग की उपज नहीं है बल्कि यह आने वाले फेंच फैशन की देन है। जिसका चलन धीरे-धीरे दुनियाभर में प्रचलित हो गया। इतिहासकार बताते है, कि पुराने समय से ही रंगों का ऐसा ही बंटवारा होता रहा है। बीसवीं सदी की शुरुआत में रंगों का विभाजन बिलकुल उल्टा था। हांगकांग से छपने वाली महिलाओं की पत्रिका ने उस समय के कई आर्टिकल इस बात की पुष्टि भी करते हैं। जिसमें निला रंग महिला के लिए था और गुलाबी रंग पुरुषों के लिए होता था। इसका कारण यह है कि गुलाबी रंग का निर्माण लाल रंग से होता है जोकि रक्त, युद्ध और ताकत का प्रतीक है। इसलिए पुराने रोमन सैनिकों के हेल्मेट पर लाल और गुलाबी रंग की कलगी होती है।

रंगों ने तय किया काम

कई रिपोर्ट के अनुसार प्रथम विश्वयुद्ध के समय एक ऐसी घटना हुई थी जिसमें इस स्टीरियोटाइप को तय किया गया। दरअसल, प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान रोजगार के कई अवसर भी बने। इसमें नर्स, वेटर, सेक्रेटरी और टायपिस्ट आदि जैसी कई नौकरियां शामिल थीं। इन नौकरियों को व्हाइट कॉलर और ब्लू कॉलर के दर्जे में नहीं रखा जा सकता था। इसलिए इन्हें पिंक कॉलर जॉब्स का दर्जा मिला। इन्हें महिला प्रधान माना गया और इसी दौर के बाद से गुलाबी रंग महिलाओं के प्रचलन में चला। 

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस

साल 2012 के बाद से 11 अक्टूबर के दिन को हर साल अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में मनाया जाता है। हर साल इसे एक थीम के साथ मनाया जाता है। 2022 में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का थीम है अब हमारा समय है,हमारे अधिकार, हमारा भविष्य। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने की शुरुआत एक गैर सरकारी संगठन प्लान इंटरनेशनल के प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी। इस अभियान के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के लिए कनाडा सरकार से संपर्क किया गया। कनाडा सरकार ने 55वें आम सभा में इस प्रस्ताव को रखा और 19 दिसंबर, 2011 को संयुक्त राष्ट्र ने इस प्रस्ताव को पारित किया। इसके लिए 11 अक्टूबर की तारीख तय की गई और 2012 के बाद से हर साल इसे मनाया जाता है।

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