प्याज और लहसुन का राक्षसों से है गहरा नाता! इस वजह से नहीं किया जाता नवरात्रि में इनका सेवन

प्याज और लहसुन का राक्षसों से है गहरा नाता! इस वजह से नहीं किया जाता नवरात्रि में इनका सेवन

नई दिल्ली: साल में दो बार नवरात्रि का महत्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म में नवरात्रि को विशेष उत्शव मनाया जाता है। नवरात्रि नौ दिनों के लिए होते है। इन नौ दिनों में शादीशुदा और कुंवारी कन्याएं व्रत करती है। और अपने मनोकामना माता रानी के सामने रखती है। ऐसा माना जात है कि इन नौ दिनों में माता रानी से जो भी सच्चे मन से मांगा जाएं तो उनकी मनोकामना पूरी होती है। वहीं  इन नौ दिनों में व्रत के दौरान सात्विक भोजन किया जाता है। दरअसल जिन महिलाओं  और कन्याओं ने व्रत रखा होता है वो सुबह नहाकर मां दुर्गा की पूजा की जाती है। हालांकि हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है और मां को प्रसन्न करने की कोशिश की जाती है।

इन नौ दिनों में व्रत रखने वाली महिलाएं और कन्याएं फल, सब्जियां, कुट्टू आटा, साबूदाना और सेंधा नमक आदि का सेवन करते है। वहीं घर में रह रहे लोगों को भी सात्विक भोजन किया जाता है। सात्विक भोजन का मतलत है कि घर में प्याज और लहसुन का नौ दिनों तक सेवन बंद कर दिया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचना है कि नवरात्रि में इन दो चीजों का सेवन ही बंद क्यों किया जाता है। इसके पीछे एक कथा है जो आझ हम आपको बताएंगा।

दरअसल हिंदु पुराणों के अनुसार, जब देवता और असुरों के बीच सागर मंथन हो रहा था तो उसमें 9 रत्न निकले थे और आखिरी में अमृत निकला था। इसके बाद भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप लिया और देवताओं को अमृत पिलाने लगे. तभी दो दानव राहु-केतु ने देवताओं का रूप रख लिया और अमृत पी लिया। इसके बाद भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से अलग कर दिया। माना जाता है कि उनका सिर जब धड़ से अलग हुआ तो उनके खून की कुछ बूंदें जमीन पर गिर गईं और उससे ही लहसुन प्याज की उत्पत्ति हुई। इसलिए ही प्याज और लहसुन से तीखी गंध आती है।

 यह भी बताया जाता है कि राहु-केतु के शरीर में अमृत की कुछ बूंदें पहुंच गई थीं इसलिए उनमें रोगों से लड़ने क्षमता पाई जाती है। पुराणों में प्याज और लहसुन को राजसिक और तामसिक माना जाता है। तामसिक भोजन जैसे मांस-मछली, प्याज, लहसुन आदि राक्षसी प्रवृत्ति के भोजन कहलाते हैं। जिसके सेवन से घर में अशांति, रोग और चिंताएं घर में प्रवेश करती हैं इसलिए प्याज-लहसुन का सेवन खाना हिंदु धर्म में वर्जित माना जाता है।

वहीं वैज्ञानिक का कहना है कि शरद नवरात्रि अक्टूबर या नवंबर के महीने में आती है, जबकि अक्टूबर-नवंबर के महीने में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है। मौसम में व्यापक बदलाव के चलते इस दौरान हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस मौसम में सात्विक भोजन करने का नियम बनाया गया है। सात्विक भोजन खाने से आपके पाचन तंत्र को बेहद आराम मिलता है और शरीर की सभी अशुद्धियां भी साफ हो जाती हैं।

Leave a comment