
Neeraj Chopra:भले ही गोल्डन ब्वाय नीरज चोपड़ा पेरिस ओलिम्पिक में गोल्ड ना जीत पाए हैं, लेकिन रजत हासिल करने के बाद से भी उनके पैतृक गांव खंडरा में दीवाली का सा माहौल देखा गया। फाइनल शुरू होने से पहले ही ग्रामीणों का उत्साह देखने योग्य रहा। गांव खंडरा में आधी रात को भी लोग नीरज का गांव में लगी हुई बड़ी स्क्रीन पर इस तरह से हौसला बढ़ाते रहे, मानो की सभी लोग पेरिस में ही नीरज को देख रहे हों। रजत हासिल करने के बाद भी गांव खुशी का माहौल बना रहा, इस दौरान आसपास के लोगों ने भी लड्डू बांटकर और आतिशबाजी चलाकर दीवाली जैसा माहौल बना दिया।
पेरिस में ओलंपिक में अरशद नदीम की जीत पर नीरज चोपड़ा की मां सरोज देवी ने कहा कि 'हम तो बहुत खुश हैं। हमें तो सिल्वर भी गोल्ड के जैसा ही लग रहा है। जिस लड़के को गोल्ड मेडल मिला है, वह भी हमारा ही लड़का है। बहुत मेहनत करता है। इस बयान की चर्चा भारत में ही नहीं पूरे पाकिस्तान में हो रही है। पाकिस्तान के सोशल मीडिया में उनके बयान की काफी चर्चा हो रही है।
यह हमारे लिए गर्व की बात है- नीरज के पिता
नीरज चोपड़ा के पिता सतीश कुमार ने कहा, "उसने देश के लिए रजत पदक जीता है, हमें खुशी और गर्व है...सभी युवाओं को उससे प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि हर किसी का अपना दिन होता है, आज पाकिस्तान का दिन था। लेकिन हमने रजत पदक जीता, और यह हमारे लिए गर्व की बात है।
नीरज ने रचा इतिहास
आपको बता दें कि आजादी के बाद एथलेटिक्स में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। इससे पहले 1900 में नॉर्मन प्रिचर्ड ने एथलेटिक्स में दो पदक जरूर जीते थे, लेकिन वह ब्रिटिश मूल के थे। नीरज चोपड़ा ने चौथे प्रयास में भी फाउल किया और वह फिलहाल 89.45 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ दूसरे स्थान पर बने हुए हैं।
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