
NCERT Book Controversy: कक्षा आठ के एनसीईआरटी किताब पर संग्राम छिड़ गया है। किताब में ज्यूडिशयरी को लेकर जो अंश लिखे गए है। उसने सुप्रीम कोर्ट को भी नाराज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी दोषियों को नहीं छोड़ने की बात कही है। वहीं, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में खेद जताया है।
अब सवाल है कि आखिरकार एनसीईआरटी की किताब का सिलेबस तय कौन करता है। किसकी क्या भूमिका होती है। इसके लिए अलावा किताब के प्रकाशन का आखिरी फैसला कौन लेता है। आइए जानते हैं सबकुछ
किताब प्रकाशित करने की प्रक्रिया
बता दें कि कक्षा 6 से 12 तक का एनसीईआरटी सिलेबस बनाने के लिए विशेषज्ञों की समितियां बनाई जाती हैं। इन समितियों में इतिहास, भूगोल, राजनीतिक विज्ञान, समाजशास्त्र और मनोविज्ञान जैसे विषयों का पाठ्यक्रम को फ्रेम किया जाता है। सोशल साइंस के लिए मिशेल डैनिनो की अगुवाई में 35 सदस्यीय समिति बनी थी। इनका काम यह सुनिश्चित करना है कि पाठ्यक्रम नई शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के अनुकूल तैयार हो। वहीं, सिलेबस तैयार होने के बाद इसे विशेषज्ञों ने रिव्यू किया और फिर NCERT डायरेक्टर के फॉरवर्ड के साथ प्रकाशित किया गया।
किताब को लेकर क्यों विवाद
बता दें कि कक्षा 8वीं की किताब में ज्यूडिशयरी की आलोचना करने वाले लेख शामिल थे। जिसपर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह साजिश भी हो सकती है और बिना शर्त माफी स्वीकार नहीं होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य में किसी को भी इस संस्थान की गरिमा को नुकसान पहुंचाने की परमिशन नहीं दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित चैप्टर को हटाने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इसे बड़ा कैलकुलेटेड कदम बताया और न्यायपालिका को भ्रष्ट करार देने की बात कही। इसके अलावा जस्टिस बागची ने कहा कि डिजिटल युग में हजारों प्रतियां शेयर हो चुकी होंगी, इसलिए जांच जरूरी है।
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