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हाथ-पैर नहीं नाक को बनाया निशाना, अबतक आधे दर्जन लोग बने शिकार, कानपुर में 'नाककटवा’ ने मचाई दहशत

हाथ-पैर नहीं नाक को बनाया निशाना, अबतक आधे दर्जन लोग बने शिकार, कानपुर में 'नाककटवा’ ने मचाई दहशत

Kanpur News:उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के गुमानीपुरवा गांव में इन दिनों एक ऐसी दहशत फैली हुई है, जो किसी जंगली जानवर या चोर गिरोह से कहीं ज्यादा डरा रही है। यहां एक व्यक्ति झगड़ों के दौरान कथित तौर पर नाक काट देता है। जानकारी के अनुासार, ये व्यक्ति अभी तक आधा दर्जन से ज्यादा लोगों की नाक काट चुका है। जिसके बाद से लोगों ने उसका नाम 'नाककटवा' रख दिया है। इस समस्या से तंग आकर पीड़ितों ने मदद की गुहार लगाई हैं। इस समय गांव का माहौल एकदम डरावना हो गया है, कोई भी अकेले घर से नहीं निकलना चाहता।

कौन है 'नाककटवा'?

गांव वालों के अनुसार, यह 'नाककटवा' कोई और नहीं, बल्कि अलवर नामक एक स्थानीय निवासी है। अवधेश नामक एक पीड़ित ने बताया कि अलवर झगड़ों में इतना हिंसक हो जाता है कि वह चाकू या तेज हथियार से सामने वाले की नाक काट देता है। अवधेश ने आगे बताया कि यह कोई प्रेत या रहस्यमयी साया नहीं है, बल्कि एक इंसान है जो हमारे बीच ही रहता है। अब तक आधा दर्जन से ज्यादा लोगों की नाक कट चुकी है। हर कोई डर के मारे घर से बाहर निकलने से कतराता है।

पीड़ितों का दावा है कि ये हमले छोटे-मोटे विवादों जैसे - जमीन या पारिवारिक झगड़ों के दौरान हुए हैं। एक अन्य ग्रामीण ने कहा कि अलवर का गुस्सा इतना तीव्र होता है कि वह रामायण की शूर्पणखा की कहानी को साकार कर देता है। लक्ष्मण की तरह वह नाक काटकर चेतावनी देता है, लेकिन यहां यह हिंसा बार-बार हो रही है।" गांव में महिलाओं का कहना है कि वे अब शाम ढलते ही दरवाजे बंद कर लेती हैं, और बच्चे स्कूल से लौटते ही घर में कैद हो जाते हैं।

दर्द और डर की अनकही कहानियां

कई पीड़ितों ने अपनी कहानियां साझा करते हुए न केवल शारीरिक पीड़ा का जिक्र किया, बल्कि मानसिक आघात पर भी रोशनी डाली। एक 35वर्षीय किसान, जिसकी नाक पिछले महीने कटी थी, ने बताया 'झगड़ा जमीन की सीमा को लेकर हुआ था। अलवर ने अचानक चाकू निकाला और मेरी नाक काट दी। अस्पताल में सिलाई हुई, लेकिन जख्म तो दिल में है। अब गांव में कोई मुझसे आंखें नहीं मिलाता, डर लगता है कि कहीं फिर निशाना न बन जाएं।'

एक अन्य पीड़िता ने कहा 'मेरे बेटे की नाक कटने के बाद पूरा परिवार बेघर हो गया। हम रिश्तेदारों के पास शरण लेते हैं, लेकिन गांव लौटना मुश्किल है। अलवर का नाम सुनते ही सिहरन दौड़ जाती है।' इन घटनाओं ने गांव के सामाजिक ताने-बाने को चीर दिया है। लोग एक-दूसरे पर शक करते हैं और छोटे विवाद भी बड़े टकराव में बदल जाते हैं।

जनता दरबार में पहुंची फरियाद

इन घटनाओं की गंभीरता को भांपते हुए पीड़ितों ने कानपुर के जिलाधिकारी (डीएम) के जनता दरबार में शिकायत दर्ज कराई। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय पुलिस को निर्देश दिए हैं कि अलवर के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और उसे गिरफ्तार किया जाए। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "हमने गांव में गश्त बढ़ा दी है। अलवर की तलाश जारी है, और पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान की जा रही है। साथ ही, सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम चलाकर हिंसा रोकने के प्रयास हो रहे हैं।

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