CM Yogi on Sanatan Dharma: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज 13 सितंबर रविवार को रायबरेली में राज्य कैबिनेट मंत्री मनोज कुमार पांडे द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने समाज में धर्म की भूमिका पर बात की और देश के विभिन्न क्षेत्रों में भगवान शिव के प्रति साझा श्रद्धा को उजागर किया। सभा को संबोधित करते हुए CM योगी ने कहा कि धर्म को केवल पूजा-पाठ का साधन नहीं, बल्कि समाज की जीवन शक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने अतीत में देश के सामने आई चुनौतियों को राजनीतिक कमजोरियों से जोड़ा और मध्यकाल में कवि-संत तुलसीदास द्वारा निभाई गई भूमिका को याद किया।
तुलसीदास का जिक्र करते हुए क्या बोले CM योगी?
मुख्यमंत्री ने कहा 'हमने धर्म को केवल पूजा-पाठ का साधन नहीं बनाया है, बल्कि इसे समाज की जीवन शक्ति के रूप में देखा है।' उन्होंने कहा कि राजनीतिक कमजोरियों के कारण देश को विदेशी आक्रमणकारियों का सामना करना पड़ा। तुलसीदास का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने मध्यकाल में, जब धर्म पर आक्रमण हो रहा था, रामकथा के माध्यम से काम किया।
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मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के अनुसार, तुलसीदास ने रामकथा का उपयोग उस समय लोगों को एकजुट करने के लिए किया जब समाज चुनौतियों का सामना कर रहा था। उन्होंने कहा तुलसीदास ने मध्यकाल में रामकथा के माध्यम से अपना प्रभाव फैलाया...उस समय धर्म पर आक्रमण हो रहा था, और तुलसीदास ने रामकथा के माध्यम से समाज को एकजुट करने का प्रयास किया।'
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर बोले CM योगी
मुख्यमंत्री ने भारत के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोगों के बीच साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि रीति-रिवाजों, खान-पान और जीवनशैली में अंतर होने के बावजूद सनातन धर्म के अनुयायियों में भगवान शिव के प्रति गहरी श्रद्धा होती है। उन्होंने आगे कहा 'रीति-रिवाज, खान-पान और जीवनशैली भले ही भिन्न हों, लेकिन तमिलनाडु के नागरिकों में शिव के प्रति जो श्रद्धा पाई जाती है, वही श्रद्धा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के श्रद्धालुओं में, पूर्वोत्तर के सनातन धर्म के अनुयायियों में और महाराष्ट्र और गुजरात के भक्तों में भी पाई जाती है।'