'लाभ लेने के बाद कैटेगरी नहीं बदल...', जनरल vs आरक्षण सीट पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

'लाभ लेने के बाद कैटेगरी नहीं बदल...',  जनरल vs आरक्षण सीट पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

SC on Reservation vs General Seats:भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आरक्षण नीति को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि अगर कोई अभ्यर्थी किसी परीक्षा के किसी भी चरण में आरक्षण का लाभ उठाता है, तो वह सामान्य श्रेणी (जनरल कैटेगरी) की सीट पर दावा नहीं कर सकता, भले ही उसका आखिरी मेरिट रैंक सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों से बेहतर क्यों न हो। यह फैसला संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा से जुड़े एक पुराने मामले में आया है, लेकिन इसकी व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, ये मामला साल 2013 में UPSC द्वारा आयोजित IFS परीक्षा से शुरू हुआ। परीक्षा में प्रारंभिक (प्रेलिम्स), मुख्य (मेन्स) और साक्षात्कार के चरण शामिल थे। जनरल कैटेगरी के लिए प्रेलिम्स का कट-ऑफ 267 अंक था, जबकि अनुसूचित जाति (SC) के लिए 233 अंक निर्धारित किए। SC श्रेणी के एक अभ्यर्थी जी. किरण ने 247.18 अंक प्राप्त कर प्रेलिम्स क्वालीफाई किया। जबकि सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थी एंटनी एस. मरियप्पा ने 270.68 अंक से सामान्य कट-ऑफ पर क्वालीफाई किया। आखिरी मेरिट लिस्ट में किरण का रैंक 19वां था, जबकि मरियप्पा का 37वां।

कैडर आवंटन के दौरान कर्नाटक में एक सामान्य इनसाइडर रिक्ति थी, लेकिन एससी इनसाइडर रिक्ति नहीं। केंद्र सरकार ने इस सामान्य पद को मरियप्पा को आवंटित किया और किरण को तमिलनाडु कैडर में भेजा। जिसके बाद किरण ने कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां अदालत ने उनके पक्ष में फैसला दिया और कहा कि बेहतर अंतिम रैंक के आधार पर उन्हें सामान्य कैडर मिलना चाहिए। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

जस्टिस जे.के. महेश्वरी और विजय बिश्नोई की पीठ ने केंद्र सरकार की अपील को मंजूर करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि अभ्यर्थी ने परीक्षा के किसी भी चरण में आरक्षण का लाभ (जैसे कट-ऑफ में छूट) लिया है, तो वह सामान्य श्रेणी की सीट या कैडर पर दावा नहीं कर सकता। पीठ ने IFS परीक्षा नियम, 2013 के नियम 14(ii) का हवाला देते हुए कहा कि आरक्षण का लाभ उठाने वाले अभ्यर्थी को सामान्य मानक वाली लिस्ट में शामिल नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने साफ तौर पर कहा 'एक बार जब आरक्षित श्रेणी का अभ्यर्थी आरक्षण का लाभ उठा लेता है, तो वह सामान्य श्रेणी की रिक्तियों/सीटों पर नियुक्ति नहीं कर सकता।' साथ ही, 'अगर अभ्यर्थी ने परीक्षा के किसी चरण में कोई छूट ली है, तो वह नियम 14(ii) के प्रावधान के दायरे में नहीं आएगा और कैडर आवंटन नीति के लिए सामान्य मानक वाली लिस्ट में शामिल नहीं होगा।'  

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