CJP protest Supreme Court: दिल्ली में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रोटेस्ट के दौरान लगे सभी प्रतिबंधों पर कड़ी टिप्पणी की है। जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि पूरे शहर से बैरिकेड हटाए जाएं। इसके अलावा इंटरनेट सेवाओं और आम नागरिकों की आवाजाही को सामान्य किया जाएं।
दरअसल, देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन की वजह से कई रास्तों पर बैरिकेटिंग की गई, 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और इंटरनेट सेवाओं को भी बंद कर दिया। जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिस पर आज सुनवाई हो रही है।
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कोर्ट ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को प्रदर्शन के दौरान लगाई गए सभी पाबंदियों को हटाने के निर्देश दिए है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर पूरे शहर को ठप करना उचित नहीं है। किसी तरह के गंभीर खतरे की स्थिति में इस व्यवस्था को अपनाया जा सकता है।
बता दें, बीते दिन 10 अक्टूबर शनिवार को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और इंडिया ब्लॉक समेत कई लोग प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरें। पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए कड़े इंतजाम किए थे। प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने जनपथ-कर्तव्य पथ क्रॉसिंग के आसपास चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को 24 घंटे के लिए बंद कर दिया था। इसके अलावा लगभग 57 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री-एक्जिट गेट बंद किए गए थे। जबकि कई इलाकों में बैरिकेड लगाए गए थे।