Aluminum Foil Passport: आजकल सोशल मीडिया पर पासपोर्ट को एल्युमिनियम फॉयल यानी किचन में इस्तेमाल होने वाली चांदी जैसी पन्नी में लपेटकर रखने का ट्रेंड तेजी से चर्चा में है। कई यात्री फ्लाइट में सफर करने से पहले अपने पासपोर्ट को फॉयल में लपेट रहे हैं। इसके पीछे की वजह पासपोर्ट में मौजूद निजी जानकारी को बिना अनुमति स्कैन किए जाने से बचाना है। यही तरीका लोग अपने वॉलेट, डेबिट-क्रेडिट कार्ड और दूसरे वायरलेस चिप वाले कार्ड को सुरक्षित रखने के लिए भी अपना रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या सच में फॉयल पासपोर्ट और कार्ड को हैकिंग से बचा सकती है?
पासपोर्ट में होती है कौन-सी जानकारी?
आज कई आधुनिक पासपोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक चिप लगी होती है। भारत के ई-पासपोर्ट में भी ऐसी चिप होती है। इसमें यात्री का नाम, पासपोर्ट नंबर, फोटो और दूसरी पहचान संबंधी जानकारी दर्ज होती है। इस तकनीक से इमिग्रेशन अधिकारियों को यात्री की पहचान जांचने में आसानी होती है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, खास परिस्थितियों में नजदीक मौजूद अनधिकृत डिवाइस भी इन चिप से जानकारी पढ़ने की कोशिश कर सकते हैं। हर देश के पासपोर्ट में ऐसी चिप नहीं होती। पासपोर्ट के कवर पर बना छोटा कैमरे जैसा निशान आमतौर पर बताता है कि उसमें इलेक्ट्रॉनिक चिप मौजूद है।
आखिर फॉयल कैसे करती है सुरक्षा?
पासपोर्ट को फॉयल में लपेटने के पीछे फैराडे केज (Faraday Cage) का सिद्धांत काम करता है। इस सिद्धांत के अनुसार, धातु की परत रेडियो सिग्नल को रोकने या कमजोर करने में मदद कर सकती है। एल्युमिनियम बिजली का अच्छा सुचालक है। जब इससे किसी पासपोर्ट या वॉलेट को ढक दिया जाता है, तो यह वायरलेस सिग्नल और चिप के बीच संपर्क में रुकावट पैदा कर सकता है। इससे RFID रीडर के लिए चिप से जानकारी पढ़ना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि कुछ लोग कार्ड और पासपोर्ट को फॉयल में लपेटकर रखते हैं।
क्या यह तरीका पूरी तरह सुरक्षित है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, फॉयल से मिलने वाली सुरक्षा को जरूरत से ज्यादा बढ़ाकर नहीं देखना चाहिए। बंद पासपोर्ट की चिप सामान्य परिस्थितियों में आसानी से पढ़ी नहीं जा सकती। इसके अलावा, कॉन्टैक्टलेस डेबिट और क्रेडिट कार्ड में भी डेटा की सुरक्षा के लिए एन्क्रिप्शन और अन्य तकनीकों का इस्तेमाल होता है। इसलिए इस तरह से डेटा चोरी होने का खतरा सीमित है। फॉयल कितनी सुरक्षा देगी, यह उसकी मोटाई, लपेटने के तरीके और आसपास की परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। ढीली या अधूरी लपेट से अपेक्षित सुरक्षा नहीं मिल सकती।
फॉयल के बजाय क्या है बेहतर विकल्प?
पासपोर्ट को बार-बार फॉयल से निकालना और फिर लपेटना यात्रियों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। फॉयल आसानी से फट भी जाती है। इसके बजाय RFID-ब्लॉकिंग पासपोर्ट कवर और ट्रैवल वॉलेट इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इन्हें इसी तरह के वायरलेस सिग्नल को रोकने के उद्देश्य से बनाया जाता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि एयरपोर्ट पर पासपोर्ट को फॉयल में लपेटना अनिवार्य नहीं है। इमिग्रेशन अधिकारियों की ओर से भी ऐसा कोई नियम नहीं है। यह केवल एहतियात के तौर पर अपनाया जाने वाला तरीका है। यात्रियों को घबराने के बजाय अपनी निजी जानकारी की सुरक्षा के लिए व्यावहारिक उपाय अपनाने चाहिए।
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