India Lahesh Out On UN: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के मामले पर भारत और संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से सामूहिक हिरासत की खबरों पर चिंता जताए जाने के बाद भारत ने इस टिप्पणी को खारिज कर दिया है। भारत ने कहा कि OHCHR की चिंताएं बेबुनियाद हैं और देश के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप के समान हैं। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित है।
जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां शांतिपूर्ण सभा के अधिकार को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। भारतीय मिशन के मुताबिक, देश की मजबूत संस्थाएं, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
भारत ने कहा कि लोकतंत्र में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं और अधिकारी कानून के अनुसार कार्रवाई करते हैं। किसी भी शिकायत के समाधान के लिए देश की अदालतें उपलब्ध हैं। भारतीय मिशन ने OHCHR से निष्पक्षता बनाए रखने और दुनिया के दूसरे हिस्सों में होने वाले बड़े प्रदर्शनों पर भी समान रूप से ध्यान देने की बात कही।
OHCHR ने हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की मांग की
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता थामीन अल-खीतान ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन से पहले और उसके दौरान प्रदर्शनकारियों, नेताओं, नागरिक समाज के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर चिंता जताई थी।
OHCHR ने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का पूरा सम्मान करने की अपील की। कार्यालय ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए आवश्यकता और आनुपातिकता की सख्त कसौटियों का पालन होना चाहिए। साथ ही, कानून लागू करने वाले अधिकारियों से संयम बरतने और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल और बिना शर्त रिहा करने की मांग की गई। संयुक्त राष्ट्र ने प्रदर्शनकारियों की चिंताओं को दूर करने के लिए सार्थक बातचीत करने का भी आग्रह किया।
क्यों हो रहा है दिल्ली में प्रदर्शन?
CJP और अन्य संगठनों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। इसी मुद्दे को लेकर 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन का आह्वान किया गया था।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस ने कम समय पहले सूचना दिए जाने, पिछले प्रदर्शनों में कथित नियम उल्लंघन और सुरक्षा, यातायात तथा कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरों ने मामले को और गंभीर बना दिया।
इस घटनाक्रम के बाद भारत और OHCHR के बीच शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों को लेकर मतभेद सामने आए हैं। जहां भारत ने कार्रवाई को कानून और संवैधानिक व्यवस्था के दायरे में बताया है, वहीं संयुक्त राष्ट्र ने हिरासत की खबरों पर चिंता जताते हुए प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा करने की अपील की है।
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