Freebies की राजनीति पर पूर्व RBI गवर्नर का अलर्ट, कहा - चुनाव में जीत आपकी, लेकिन देश...

Freebies की राजनीति पर पूर्व RBI गवर्नर का अलर्ट, कहा - चुनाव में जीत आपकी, लेकिन देश...

RBI Governor Warning On Freebies: पूर्व RBI गवर्नर दुव्वुरी सुब्बाराव ने चुनावी फ्रीबीज को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि फ्रीबीज चुनाव तो जीता सकते हैं, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को लंबे समय में नुकसान पहुंचाते हैं। सुब्बाराव ने केंद्र, राज्य सरकारों और सभी राजनीतिक दलों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और सुझाव दिया कि फ्रीबीज पर एक कोड ऑफ कंडक्ट अपनाया जाए। पूर्व गवर्नर का मानना है कि गरीब देश में ट्रांसफर पेमेंट्स जरूरी हैं, लेकिन इनकी अंधाधुंध होड़ वित्तीय संकट पैदा कर सकती है।

फ्रीबीज की संस्कृति पर उठाए सवाल

सुब्बाराव ने फ्रीबीज कल्चर पर पुनर्विचार की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि फ्रीबीज आकर्षक लगते हैं और राजनीतिक फायदा दे सकते हैं, लेकिन ये कर्ज से फाइनेंस होते हैं, जिन्हें चुकाना पड़ता है। जैसे महिलाओं के लिए फ्री बस राइड जैसी स्कीमों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इनकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन नहीं होता। पूर्व गवर्नर ने प्रतिस्पर्धी पॉपुलिज्म को वित्तीय रूप से खतरनाक बताया, जो लंबे समय में विकास को बाधित करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री की 'रेवड़ी कल्चर' वाली टिप्पणी का जिक्र किया, लेकिन कहा कि चुनावों में फ्रीबीज की होड़ जारी है।

पूर्व RBI प्रमुख ने केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और सभी पार्टियों को फ्रीबीज के लिए दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र चुनावों में फ्रीबीज और दिल्ली चुनावों से पहले की घोषणाएं इसका उदाहरण हैं। सुब्बाराव के अनुसार, फ्रीबीज से राजनीतिक लाभ जरूरी नहीं मिलता, लेकिन ये अर्थव्यवस्था पर बोझ डालते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार सभी पार्टियों और सरकारों से बातचीत शुरू करे और फ्रीबीज पर एक कोड ऑफ कंडक्ट अपनाए, जो अर्थव्यवस्था के हित में होगा।

आर्थिक प्रभाव और सुझाव

बता दें, सुब्बाराव ने फिस्कल फेडरलिज्म पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों की जनसंख्या बढ़ाने की मांग कोई समाधान नहीं, क्योंकि भारत एक देश है और कुल जनसंख्या का मुद्दा सामान्य है। फ्रीबीज पर कोड ऑफ कंडक्ट के लिए उन्होंने राज्यों और स्टेकहोल्डर्स से विस्तृत परामर्श की सलाह दी। उनका मानना है कि संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल विकास पर होना चाहिए, न कि पॉपुलिस्ट स्कीमों पर। हालिया यूनियन बजट 2025 के संदर्भ में उन्होंने कहा कि केंद्र फिस्कल जिम्मेदारी दिखाकर उदाहरण पेश कर सकता है।

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