फर्टिलिटी रेट में बड़ी गिरावट...माता-पिता अब पॉपुलेशन कंट्रोल को दे रहे प्राथमिकता, जनसंख्या पर क्या होगा असर?

फर्टिलिटी रेट में बड़ी गिरावट...माता-पिता अब पॉपुलेशन कंट्रोल को दे रहे प्राथमिकता, जनसंख्या पर क्या होगा असर?

India Fertility Rate: भारत में प्रजनन दर (TFR) में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जो जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में एक अहम कदम है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2025में भारत की कुल प्रजनन दर 1.9पर पहुंच गई है, जो प्रतिस्थापन स्तर 2.1से नीचे है।  यह गिरावट भारतीय माता-पिता की बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है, जहां शिक्षा, आर्थिक दबाव और परिवार नियोजन की समझ ने छोटे परिवारों को प्रोत्साहित किया है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ट्रेंड से भारत की जनसंख्या 2080तक 1.8-1.9अरब पर स्थिर हो सकती है और 2060के बाद इसमें कमी आने की संभावना है। वर्तमान में देश की आबादी करीब 1.469अरब है, जो दुनिया में सबसे अधिक है, लेकिन गिरती प्रजनन दर से भविष्य में जनसांख्यिकीय लाभांश समाप्त हो सकता है।

प्रजनन दर में गिरावट का ट्रेंड

भारत की प्रजनन दर में पिछले दशकों से लगातार कमी आ रही है। 2015में जहां TFR 2.4था, वह 2025में 1.9पर आ गया है। यह गिरावट पूरे देश में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय रूप से अलग-अलग है। दक्षिणी राज्यों जैसे केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में TFR पहले से ही 1.5-1.7के आसपास है, जबकि उत्तर भारत के कुछ राज्यों जैसे बिहार और उत्तर प्रदेश में यह 2.1से ऊपर बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर देखें तो 1960में प्रजनन दर 5के करीब थी, जो 2024में 2.2पर पहुंची है, लेकिन भारत में यह बदलाव तेजी से हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट जनसंख्या नियंत्रण के लिए सकारात्मक है, लेकिन यह चुनाव की स्वतंत्रता पर आधारित होनी चाहिए, न कि जबरदस्ती पर।

गिरावट के प्रमुख कारण

भारतीय माता-पिता अब जनसंख्या नियंत्रण को लेकर काफी गंभीर हो गए हैं। शिक्षा का प्रसार, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, शहरीकरण और आर्थिक चुनौतियां प्रमुख कारण हैं। परिवार नियोजन कार्यक्रमों जैसे 'हम दो हमारे दो' की सफलता ने छोटे परिवारों को लोकप्रिय बनाया है। इसके अलावा, महंगाई, आवास की कमी और बच्चों की शिक्षा-स्वास्थ्य पर बढ़ते खर्च ने लोगों को कम बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से गर्भनिरोधक साधनों का उपयोग बढ़ा है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ इसे 'जनसांख्यिकीय संकट' मानते हैं, क्योंकि इससे बुजुर्ग आबादी बढ़ सकती है और कार्यबल में कमी आ सकती है।

गिरती प्रजनन दर से भारत की जनसंख्या में स्थिरता आने की उम्मीद है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार, 2025 में 1.46 अरब की आबादी 2050 तक 1.67 अरब और 2060 तक चरम पर पहुंच सकती है, उसके बाद कमी शुरू हो जाएगी।  2080 तक जनसंख्या 1.8-1.9 अरब पर स्थिर हो सकती है। यह अनुमान वर्तमान TFR पर आधारित हैं, लेकिन अगर प्रजनन दर और गिरती रही, तो 2100 तक आबादी 1 अरब से नीचे भी जा सकती है। इससे अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा, क्योंकि युवा कार्यबल कम होगा और पेंशन, स्वास्थ्य जैसी सेवाओं पर दबाव बढ़ेगा। हालांकि, यह पर्यावरण और संसाधनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

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