Ujjain Shahi Masjid Protest: मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक बड़ा बवाल हो गया है। यहां अब्दालपुरा इलाके में शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई की जा रही थी, लेकिन तभी वहां के लोग विरोध-प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान पत्थरबाजी की घटना भी दर्ज की गई। जिसके बाद पुलिस को हालात काबू करने के लिए भीड़ पर आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। हालात को देखते हुए शाही मस्जिद परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम करते हुए 2500 से ज्यादा पुलिस बलो को तैनात किया गया। साथ ही, पूरे शहर में अलर्ट जारी कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, उज्जैन में सिंहासन कुंभ की तैयारियों से पहले सड़क चौड़ीकरण परियोजना अभियान चल रहा है। जिसके लिए शाही मस्जिद के एक हिस्से को गिराए जाने का फैसला लिया गया। जिसके तहत कई लोग सड़कों पर उतर आए और विरोध करने लगे। प्रदर्शनकारियों को गलियों से आगे बढ़ने का प्रयास करते देखा गया, जहां आगे बढ़ने और विरोध करने की कोशिश कर रही महिलाओं को धक्का दिया गया। इस दौरान मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों पर भी पत्थर फेंके गए।
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बताया जा रहा है कि इस मामले में मुस्लिम समुदाय दो गुट में बंट गए है। एक गुट शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाए जाने के पक्ष में हैं, जबकि दूसरा गुट इस फैसले का विरोध कर रहा है। बता दें, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पैतृक घर पर तोड़फोड़ की कार्रवाई के साथ उज्जैन में विभिन्न विकास कार्यों का शुभारंभ किया। सिंहस्थ 2028 मेले से पहले उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत 272 ढांचों को गिराने के लिए चिह्नित किया गया है। जबकि विपक्ष ने इसका कड़ा विरोद किया।
विपक्ष ने उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने मस्जिद परिसर को गिराए जाने का विरोध किया है और राज्य सरकार से लोगों की भावनाओं का सम्मान करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा 'सड़क चौड़ीकरण के बहाने उज्जैन की शाही मस्जिद को गिराने के प्रशासनिक प्रयासों में थोड़ी संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। 600 साल पुराने ऐतिहासिक स्थल को सिर्फ सड़क चौड़ीकरण और विकास के नाम पर तोड़ना घृणा की पराकाष्ठा है। मुझे पता चला है कि जब मामला अदालत में लंबित है, तो मस्जिद का बार-बार घेराव करके प्रशासन क्या संदेश देना चाहता है? उज्जैन के हजारों युवा इस मुद्दे पर लगातार आवाज उठा रहे हैं। उज्जैन प्रशासन से मेरा अनुरोध है कि वह जनभावना का सम्मान करे और सड़क चौड़ीकरण के लिए आवश्यक भूमि दूसरी तरफ से अधिग्रहित करे। किसी भी परिस्थिति में इतने ऐतिहासिक महत्व के ऐतिहासिक स्थल को तोड़ना सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती।'