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50 विधायकों का समर्थन भी नहीं आया काम, राहुल गांधी के भरोसेमंद नेता वेणुगोपाल को क्यों नहीं मिली CM की कुर्सी?

50 विधायकों का समर्थन भी नहीं आया काम, राहुल गांधी के भरोसेमंद नेता वेणुगोपाल को क्यों नहीं मिली CM की कुर्सी?

Why Venugopal Not CM: केरलम विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस-नीत यूडीएफ ने भारी बहुमत के साथ जीत हासिल की। जिसके बाद आज राज्य के मुख्यमंत्री के नाम से भी पर्दा हट गया है। वीडी सतीशन को केरलम का नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि मुख्यमंत्री पद के लिए राहुल गांधी के सबसे भरोसेमंद सहयोगी और एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल को राज्य की कमान सौंपे जाने को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। उन्हें कांग्रेस के 63 में से करीब 50 विधायकों का समर्थन मिला। बावजूद इसके वह मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाए। तो चलिए इसके पीछे के कारणों के बारे में जानते हैं।

1. जनता और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय भूमिका

वेणुगोपाल को विधायक दल दल में बहुमत (40+ MLAs) का समर्थन मिला। लेकिन वीडी सतीशन पिछले 5 साल से विपक्ष के चेहरे के रूप में पिनारायी विजयन सरकार के खिलाफ लगातार सक्रिय रहे। इसके अलावा जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी  भूमिका भी अहम रही। 

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2. गठबंधन में दरार पड़ने का खतरा

यूडीएफ में शामिल आईयूएमएल समेत अन्य सहयोगी दलों ने सतीशन की ही चुना। तो वहीं,  वेणुगोपाल के नाम पर कुछ गुटों में असंतोष जताया। जिससे पार्टी में गठबंधन में दरार पड़ सकती थी। इसलिए पार्टी को एक ऐसे चेहरे की तलाश की जो पूरे यूडीएफ को एकजुट रख सके

3. वेणुगोपाल को राष्ट्रीय भूमिका के लिए बचाया गया

पार्टी के कुछ सूत्रों की मानें तो वेणुगोपाल को केरलम से हटाकर दिल्ली में और बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसलिए केरलम में उन्हें सीएम न बनाकर हाईकमान ने दोनों मोर्चों पर मजबूती बनाए रखने का रणनीतिक फैसला लिया। बता दें, वेणुगोपाल राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाते हैं।

4. लोकसभा-विधानसभा उपचुनाव पर मंडराता खतरा

वेणुगोपाल अलप्पुझा लोकसभा सीट से सांसद हैं। ऐसे में अगर वे मुख्यमंत्री बनते तो लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव दोनों कराने पड़ते। जिस वजग से पार्टी को काफी नुकसान भी हो सकता है।

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