Onion Price Hike: देश में एक बार फिर आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ता नजर आ रहा है। त्योहारी सीजन के बीच प्याज के साथ चीनी और खाद्य तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। जिससे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ रहा है और मध्यम-निम्न आय वर्ग के परिवार प्रभावित हो रहे है। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि रसोई के सामान अचानक इतने मंहगे क्यों हो रहे हैं? क्या बढ़ती हुई कीमतों के पीछे उत्पादन में कमी, बदलता हुआ मौसम पैटर्न या सप्लाई चेन में रुकावट जैसे कारक जिम्मेदार हैं? तो चलिए इनके कारणों को समझते है।
प्याज की कीमतों में उछाल क्यों?
सितंबर महीने में प्याज की कीमतों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी देखी गई, जिसका मुख्य कारण उत्पादन और बाजार में उपलब्धता का असंतुलन माना गया। बता दें, प्याज की कीमतें साल-दर-साल 108% बढ़ीं। दरअसल, इस साल कमजोर मानसून और पिछले कुछ सालों में प्याज के कम दाम मिलने के कारण किसानों ने इसकी खेती में कटौती की। जिससे बाजार में प्याज की उपलब्धता प्रभावित हुई। सितंबर में रिटेल महंगाई दर बढ़कर 5.54% हो गई, जबकि कंज्यूमर फ़ूड महंगाई दरों में इजाफा देखा गया, जिससे घरों का बजट हिल गया। लेकिन यह दर जगह के हिसाब से अलग-अलग दर्ज की गई। जैसे - सितंबर में ग्रामीण खुदरा महंगाई 6.08% रही, तो वहीं, शहरों में यह दर 4.88% रही
चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?
प्याज के साथ चीनी के दामों में भी इजाफा हुआ। इसका कारण गन्ने का उत्पादन, मौसम का बदलता चक्र और चीनी मिलों की सप्लाई है। कमजोर बारिश और अल नीनो की वजह से कुछ गन्ना उत्पादक क्षेत्रों पर इसका असर बखूबी देखने को मिला। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2026-27 के दौरान चीनी का उत्पादन करीब 14 फीसदी घटकर 2.95 करोड़ टन रह सकता है। फिलहाल, चीनी की कीमतों में 30% का इजाफा हुआ है, जबकि गुड़ की कीमतें 23% बढ़ीं।
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