
नई दिल्ली: इस समय देश में डेंगू के मरीज काफी तेजी से बढ़ते जा रहे है। इस बुखार के बढ़ते ग्राफ का कारण चिंता बढ़ना सामान्य बात है। ऐसे में जरूरत होती है कि अतिरिक्त सावधानी बरती जाए ताकि इस बीमारी को फैलाने वाले मच्छर घर के आस-पास कही भी पनप ना पाएं। डेंगू के मच्छरों को पनपने से बचाने का प्रयास सामूहिक होना चाहिए। वहीं दिल्ली में लगातार डेंगू के मामले बढ़ते हुए नजर आ रहे है।
बता दें कि एम्स के मेडिसिन विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉक्टर नीरज निश्चल का कहना है कि डेंगू होने पर आराम करना और लगातार तरल पदार्थ लेते रहना सबसे ज्यादा जरूरी है। प्लेटलेट्स की संख्या से ज्यादा सामान्य रक्त जांच में दिखने वाली हेमेटोक्रेट की निगरानी बेहद जरूरी है। जबकि देखा गया है कि डेंगू की पुष्टि होने के बाद लोग प्लेटलेट्स कम होने पर घबराने लगते हैं। डेंगू के इलाज का मतलब केवल प्लेटलेट्स बढ़ाना नहीं है। जान तभी बचेगी जब मरीज का रक्तवाहिनियों में लीक ठीक होगा।
डेंगू के कई प्रकार नहीं होते
यह एक मिथ है कि डेंगू सिर्फ एक ही तरह का होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)के अनुसार, डेंगू के वायरस के 4 सीरोटाइप होते हैं। जब किसी व्यक्ति को डेंगू हो जाता है तो उसके शरीर में सिर्फ उस सीरोटाइप के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है, जिस सीरोटाइप का डेंगू उसे हुआ होता है। यह प्रतिरोधक क्षमता डेंगू के अन्य सीरोटाइप के लिए अस्थाई और आंशिक होती है। इसलिए दूसरी या तीसरी बार में होने वाला डेंगू पहले हुए डेंगू की तुलना में अधिक घातक हो सकता है।
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