
नई दिल्ली: भारत देश में हर जाति-धर्म के लोग रहते है। वहीं जाहिर सी बात है कि हर धर्म-जाति के लोग रहेंगे तो उनके रीति-रिवाज भी अलग-अलग होंगे। लेकिन कई समुदाय के रीति-रिवाज इतने अलग होते है कि उनको बारे में जानकर ही हैरान के सिवाएं ओर कुछ नहीं होता है। ऐसे में एक समुदाय है जिसमें शादी की कपड़े का रंग सुकर आप हैरान हो जाएंगे।
आमतौर पर शादी में दूल्हा-दुल्हन लाल रंग के कपड़े पहनते है लेकिन एक समुदाय है जिसमें शादी के कपड़े सफेद रंग के पहने जाते है। हालांकि ईसाई धर्म में लड़कियां सफेद रंग के कपड़े पहनती है। लेकिन जिस समुदाय के बारे में बताएंगे उसके पीछे की वजह भी हैरान कर देने वाली है। दरअसल मध्य प्रदेश के भमडोंगरी गांव में आदिवासी समाज रहता है। जिसमें दुल्हन को विधवा के कपड़े यानी सफेद रंग के कपड़ों में विधाई की जाती है। इतना ही नहीं शादी में शामिल होने वाले लोगों के कपड़े भी सफेद रंग के होते है।
इसके पीछे के कारण की बात करें तो भमडोंगरी गांव में रहने वाले गौंडी धर्म को मानते है। उनके धर्म के अनुसार सफेद रंग शांति का प्रतीक होता है। इस रंग को पवित्र मानते है क्योंकि इसमें किसी की मिलावट नहीं होती है। इसलिए शादी के मौके पर सफेद लिबास को पहनना शुभ मानते है। शादी में शामिल होने वाले सभी लोग सफेद कपड़े ही पहनते है।
वहीं आमतौर पर दुल्हन शादी के समय अपने घर पर ही सात फेरे लेती है। लेकिन इस समुदाय में दूल्हे के घर पर फेरे लिए जाते हैं। चार फेरे दुल्हन के घर पर और बाकी के तीन दूल्हे के घर पर लिए जाते है। इस गांव में रहने वाले गौंडी धर्म के लोग अन्य आदिवासी रिवाजों से अलग नियम मानते हैं। साथ ही यहां शराब पूरी तरह प्रतिबंधित है।
Leave a comment