
नई दिल्ली: मंकीपॉक्स वायरस ने पूरी दुनियाभर के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि भारत के लोगों के लिए एक राहत की बात सामने आई है। देश में पहला मंकीपॉक्स का वायरस स्ट्रेन सुपर स्प्रेडर नहीं है। इस बात की जानकारी मंकीपॉक्स के दो मरीजों के जीनोम सीक्वेंसिंग से सामने आई है। वैज्ञानिकों के द्वारा भी इस बात की पुष्टि की गई है कि मंकीपॉक्स के A.2क्लैड के सुपर स्प्रेडर होने के सबूत नहीं मिले है।
बता दें की वैज्ञानिकों के अनुसार केरल के दोनों व्यक्ति मंकिपॉक्स वायरस के शिकार हो गए थे। वहीं CSIR-IGIB के विज्ञानिकों का कहना है कि पूरी दुनिया में मंकीपॉक्स के 60 फीसदी से ज्यादा मामले यूरोप में मिले है।ज्यादातर जगहों पर वायरस का बी.1 क्लैड फैल रहा है।डॉक्टर विनोद स्कारिया का कहना है कि वायरस के A.2 क्लैड के सुपर स्प्रेडर होने के सबूत नहीं मिले हैं। हमारा मानना है कि केरल के दोनों मरीज किसी संयोग के चलते संक्रमित हुए हैं। भारत मे मंकीपॉक्स के अब तक कुल 4 मामलों की पुष्टि की जा चुकी है। इन में से केरल में 3 और देश की राज्धानी दिल्ली में 1 मामले की पुष्टि की गई थी।
वहीं डब्ल्यूएचओ और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय को मंकीपॉक्स के संक्रमण के मामलों का पता लगाने के लिए औऱ उनके प्रबंधन के लिए एक संवेदनशील रणनीति पर काम करने के लिए कहा गया है।इसके अलावा डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि मंकीपॉक्स एक ऐसा वायरस है जो जानवरों से मनुष्य में फैलता है। इस बीमारी के लक्षण बिल्कुल चेचक के समान होते है,हालांकि डाक्टरों का कहाना है कि यह ज्यादा गंभीर बीमारी नहीं है।
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