MONKEYPOX: मंकीपॉक्स को लेकर जारी हुई नई गाइडलाइन, जानें इलाज और लक्षण

MONKEYPOX: मंकीपॉक्स को लेकर  जारी हुई नई गाइडलाइन, जानें इलाज और लक्षण

नई दिल्ली: कोरोना ने बाद देश-दुनिया में एक नए वायरस ने अपने पैर पसारने लगा है। हालांकि कहा जा रहा है कि यह वायरस ज्यादा खतरनाक नहीं है। वहीं इसने कई देशों में अपने पैर जाम लिए है। स्वास्थ्य विभाग की ओर ने इस वायरस की गाइडलाइनस भी जारी की है और इसके लक्षण दिखने पर तुंरत डॉक्टरों की सलाह लेने की बात भी कही है। नए वायरस का नाम मंकीपॉक्स है। मंकीपॉक्स वायरस चेचक के जैसे ही बताया जा रही है। जिस तरह चेचक में लाल दाग हो जाते है। इस नए वायरस में भी इसी तरह के लाल दाग हो जाते है।

सरकार द्वारा नई गाइडलाइनस जारी

  • संक्रामक अवधि के दौरान रोगी को 21 दिनों की तक लोगों से दूरी बनाए।
  • मंकीपॉक्स के लक्षण दिखने पर लैब में टेस्टिंग करवाए।
  • मंकीपॉक्स के लिए पीसीआर या डीएनए टेस्टिंग ही मान्य होगी।
  • रोगी अपनी देखभाल, डायग्नोसिस, केस मैनेजमेंट आदि पर ध्यान दें।
  • रोगी को अपने ओर उनके सपंर्क में आए कपड़ों से भी दूरी बनाए रखें।

मंकीपॉक्स के लक्षण

  • मंक्सीपॉक्स के होने पर सपाट त्वचा का रंग बदलने लगता है
  • त्वचा पर लाल निशान और गांठें पड़ सकती हैं।
  • सफेद पस से भरे फफोले शरीर पर पड़ सकते हैं जोकि चिकन पॉक्स की तरह दिखाई देते हैं।
  • संक्रमण की रफ्तार कम होने पर फफोले सूखने लगते हैं और 21 दिन बाद खत्म हो जाते हैं।
  • मंकीपॉक्स चेहरे से फैलना शुरू होता है। फिर बाहों, हाथों, पैरों और जननांग समेत शरीर के बाकी हिस्सों में फैलता है।

क्या है मंकीपॉक्स


मंकीपॉक्स एक चिकनपॉक्स की तरह का वायरस है लेकिन इसमें अलग तरह का वायरल संक्रमण होता है। ये सबसे पहले साल 1958 में कैद हुए एक बंदर में पाया गया था। साल 1970 में ये पहली बार ये किसी इंसान में पाया गया। ये वायरस मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के वर्षा वन इलाकों में पाया जाता है।

मंकीपॉक्स का इलाज

मंकीपॉक्सके लिए वर्तमान में कोई विशिष्ट उपचार की सिफारिश नहीं की गई है। हालांकि चेचक के खिलाफ टीकाकरण रोग को रोकने में लगभग 85 प्रतिशत प्रभावी पाया गया है इसलिए, यह मंकीपॉक्स के गंभीर लक्षणों को रोकने के लिए बचपन में चेचक के टीकाकरण की सिफारिश करता है।

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