
नई दिल्ली: भारत को स्वतंत्र बनाने तक का सफर कोई आसान काम नहीं रहा है। भारत की आजादी के लिए कितने ही क्रांतिवीरों द्वारा प्राण की आहुति दी गई है। वहीं इन्हीं स्वतंत्रता सेनानियों की बदौलत 15 अगस्त को देश में धूमधाम से आजादी का जश्न मनाया जाता है। इसके साथ इन्हीं क्रांतिक्रर्यों में से एक थे महात्मा गांधी जिन्हें भारत का राष्ट्रपिता भी कहा जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि अगर भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी नहीं होते तो कौन होता?
बता दें कि, महात्मा गांधी के अलावा सुभाष चंद्र बोस को भारत का राष्ट्रपिता हो सकते थे। क्योंकि उन्होंने भी आजादी के वक्त अपना महत्वपूर्व योगदान दिया था। वहीं जब सुभाष चंद्र बोस भारतीय प्रशासनिक सेवा को बीच में ही छोड़कर भारत आ गए। इसके अलावा उन्होंने भारत में चल रहे आंदोलन को मजबूती देने के लिए देश के बाहर जाकर आज़ादी के आंदोलन को मजबूती दी। उन्होंने आजाद हिंद फौज, आजाद हिंद सरकार और बैंक की स्थापना की और देश के बाहर हिंदुस्तान की आज़ादी के लिए अन्य देशों से समर्थन हासिल किया।
इसके साथ नेताजी ने भारतीय युवाओं में देशभक्ति की लौ जगाईं और उनके भीतर राष्ट्र प्रेम और उसके लिए बलिदान का भाव जगाया और नारा दिया- 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।' यह नारा अपने समय में युवाओं के लिए इंकलाब नारा था। इसी ने विदेशी जमीन में देश की आजादी की लड़ाई के लिए एक सेना तैयार की। ‘स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास’ पुस्तक में मदनलाल वर्मा ‘क्रान्त’ सुभाष चंद्र बोस के शब्दों में लिखते हैं कि ‘मैं जानता हूं कि ब्रिटिश सरकार भारत की स्वाधीनता की मांग कभी स्वीकार नहीं करेगी।
इसके अलावा आजाद हिंद फौंज देश का पहला ऐसा सैन्य दल था जिसमें महिलाएं भी सैन्य भूमिका में भारत की आजादी लिए बलिदान के लिए तत्पर थी। महात्मा गांधी के साथ महिलाएं अहिंसावादी नीति के साथ आंदोलन का हिस्सा थी तो वहीं नेताजी के साथ महिलाओं का एक अलग ही सैन्य रूप ‘झांसी रानी रेजिमेंट’ के रूप में मिलता है।
Leave a comment