
Mohan Bhagwat Bhopal Speech: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संघ को लेकर फैली धारणाओं पर खुलकर बात की। उन्होंने साफ कहा कि संघ को न तो पैरामिलिट्री संगठन समझना सही है और न ही बीजेपी को देखकर संघ को समझने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसा करना बहुत बड़ी गलती होगी। शुक्रवार, 2 जनवरी को भोपाल में प्रबुद्ध नागरिकों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि RSS समाज को जोड़ने और उसमें ऐसे गुण विकसित करने का काम करता है, जिससे भारत दोबारा किसी विदेशी ताकत के अधीन न जाए। उन्होंने कहा कि हम यूनिफॉर्म पहनते हैं, शाखाओं में व्यायाम करते हैं और लाठी चलाते हैं, लेकिन अगर कोई इसे पैरामिलिट्री संगठन समझता है तो यह उसकी गलत सोच है।
RSS एक अनोखा संगठन है- भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि RSS एक अनोखा संगठन है, जिसे सतही तौर पर नहीं समझा जा सकता। अगर आप RSS को बीजेपी या विद्या भारती जैसे संगठनों को देखकर समझने की कोशिश करेंगे, तो आप भ्रम में पड़ जाएंगे। भागवत ने माना कि संघ को लेकर एक झूठी कहानी गढ़ी जा रही है। आजकल लोग सही जानकारी के लिए गहराई में नहीं जाते, बल्कि विकिपीडिया जैसी जगहों पर निर्भर हो जाते हैं, जहां हर बात सच नहीं होती।
संघ किसी के रिमोट कंट्रोल से नहीं चलाता- सरसंघचालक
सरसंघचालक ने कहा कि संघ स्वयंसेवकों को संस्कार, विचार और लक्ष्य देता है, ताकि वे भारत के परम वैभव के लिए काम करें। लेकिन संघ किसी के रिमोट कंट्रोल से नहीं चलाता। उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि RSS किसी के विरोध या प्रतिक्रिया में नहीं बना और न ही वह किसी से प्रतिस्पर्धा करता है। इतिहास का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि अंग्रेज भारत पर हमला करने वाले पहले लोग नहीं थे। उन्होंने कहा कि बार-बार कम संख्या और संसाधनों वाले लोग भारत को हराने में सफल हुए, इसलिए समाज को आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा, “राजनीतिक गुलामी तो खत्म हो गई, लेकिन मानसिक गुलामी अभी भी कुछ हद तक बाकी है, जिसे खत्म करना जरूरी है।
मोहन भागवत ने की ये अपील
मोहन भागवत ने लोगों से अपने भजन, भोजन और संस्कृति पर गर्व करने की अपील की। उन्होंने स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि आत्मनिर्भर बनने के लिए आत्मगौरव जरूरी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया से व्यापार पूरी तरह बंद करने की बात नहीं है, लेकिन व्यापार अपनी शर्तों पर होना चाहिए, दबाव में नहीं। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने लोगों से RSS की शाखाओं में आने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “संघ को समझने का सबसे अच्छा तरीका है उसे करीब से देखना। जैसे चीनी की मिठास समझने के लिए उसे चखना पड़ता है, वैसे ही संघ को समझने के लिए शाखा में आना चाहिए।
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