
Atul Subash Sucide Case: 80 मिनट का वीडियो और 24 पन्नों का सुसाइड नोट, जी हां हम बात कर रहे हैं अतुल सुभाष के आत्महत्या की। बेंगलुरु के AI इंजीनियर ने पत्नी की प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने खुदकुशी कर ली। 80 मिनट के वीडियो में अतुल सुभाष ने जो कहा आप सुन कर सकते में आ जाएंगे। क्या कोई पत्नी इनती निर्मम कैसे हो सकती है। जिसने सात जन्मों तक साथ रहने का वादा किया, सात जन्म तो दूर एक जन्म भी पूरा होने से पहले तलाक ले लिया और पैसों के लिए दिन-रात अतुल को प्रताड़ित करती रही।
अपने 80 मिनट के वीडियों में सुभाष ने कहा कि निकित सिंघानिया और उसके परिवार वाले झूठे केस दायर कर प्रताड़ित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मेरी मौत के लिए निकिता सिंघानिया, साल, साले और चचेरे ससुर को जिम्मेदार बताया है। सुभाष अतुल ने जो टिशर्ट पहनी थी, उसपर लिखा था-Justice is Due यानी इंसाफ बाकी है।उन्होंने कहा कि निकिता के परिवारवालों ने घरेलू हिंसा, हत्या, दहेज प्रताड़न समेत 9 केस करवा दिए थे। इसके बहाने निकिता के परिवार पैसा मांगते थे।
न्यायिक व्यवस्था पर सवाल
सबसे बड़ी अतुल ने अपने वीडियो में जज पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अतुल सुभाष ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि जौनपुर की फैमली कोर्ट की जज रीता कौशिक ने केस को सेटलमेंट करने के लिए 5 लाख रुपए की मांग की थी। अतुल ने ज्यूडिशियल सिस्टम पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मुझे खुदकुशी कर लेनी चाहिए, क्योंकि मैं जो पैसा कमा रहा हूं, उससे मेरे दुश्मन और मजबूत हो रहे हैं। उसी पैसे का इस्तेमाल मुझे बर्बाद करने के लिए किया जाएगा। मेरे टैक्स से मिलने वाले पैसे से ये अदालत और पुलिस सिस्टम मुझे, मेरे परिवार और अच्छे लोगों को परेशान करेगा। इसलिए वैल्यू की सप्लाई खत्म होनी चाहिए।
लगातर उठ रहे सवाल
अतुल सुभाष का मामला अकेला नहीं हैं। घरेलू हिंसा और क्रूरता से जुड़े कानून अक्सर पुरुषों को आरोपी ठहराता है। इसी साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हिंसा कानून और धारा 498A को सबसे ज्यादा 'दुरुपयोग' किए जाने वाले कानूनों बताया था। तब जस्टिस बीआर गवई ने कहा था, 'नागपुर में मैंने एक ऐसा मामला देखा था। जिसमें एक लड़का अमेरिका गया था और उसे शादी किए बिना ही 50 लाख रुपये देने पड़े थे। वो एक दिन भी साथ नहीं रहा था। उन्होंने कहा था कि मैं खुले तौर पर कहता हूं कि घरेलू हिंसा और धारा 498A का सबसे ज्यादा दुरुपयोग किया जाता है।
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