
नई दिल्ली: आज यानि 2 अक्टूबर 1869 को महात्मा गांधी का जन्म पोरबंदर में हुआ था। आज उनकी 153वीं जयंती मनाई जा रही है। महात्मा गांधी कहते थे कि,“कोई आपको एक थप्पा मारे तो दूरा गाल भी आगे कर दों”। यहीं बात उनकी पूरा विश्व में प्रसिध्द है। इस दिन को अहिंसा दिवस के रुप में मनाया जाता है। इस दिन तक़रीबन 70 देशों में उनकों याद किया जाता है। आम तौर पर पूरी दुनिया उन्हें महात्मा गांधी के नाम से जानती है, लेकिन उनका असली नाम मोहनदास करमचन्द गांधी है। इसके अलावा उनकों कई ओर नाम से भी जाना जाता है, जैसे- मोहन, मिस्टर गांधी, बापू, राष्ट्रपिता शामिल हैं। लेकिन क्या अपको पता है कि उन्हें राष्ट्रपिता क्यों कहा जाता है, सबसे पहले किसने उन्हें राष्ट्रपिता की उपाधि दी?
सबसे पहले राष्टपिता कहा वाले
बता दे, महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता का दर्जा आधिकारिक रूप से नहीं दिया गया है बल्कि महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता की उपाधि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सबसे पहले दी। दरअसल 06 जुलाई वर्ष 1944 नेताजी सिंगापुर से रेडियो पर संबोधत कर रहे थे और अपने संबोधन में उन्होंने महात्मा गांधी को "राष्ट्र का पिता" कहा और उन्हें "राष्ट्रपिता" कहकर संबोधित किया इसके बाद सभी लोग महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहने लगे।
मौत के बाद संबोधन में राष्ट्रपिता
30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा महात्मा गांधी की हत्या की गई उसके बाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रेडियो पर देशवासियों को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी की हत्या की दुखद खबर सुनाई और उन्होंने देश को संबोधित करते हुए कहा कि, "राष्ट्रपिता अब नहीं रहे..." इस प्रकार उन्होंने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के लिए राष्ट्रपिता शब्द का प्रयोग किया जिस कारण आजाद भारत ने भी इस शब्द को अपना लिया। आधिकारिक रूप से महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता का दर्जा प्राप्त नहीं है किंतु लोगों के दिलों में गांधी जी राष्ट्रपिता की उपाधि धारण किए हुए हैं।
यदि बात की जाए कि नेताजी द्वारा महात्मा गांधी के लिए "राष्ट्रपिता" शब्द क्यों प्रयोग किया गया तो इसका उत्तर है कि अपने अहिंसा के रास्ते पर चलने, पूरे देश को एक साथ खड़ा करने तथा पूरे देश का मार्गदर्शन करने के लिए नेताजी ने महात्मा गांधी को "राष्ट्रपिता" की उपाधि दी। भारत की स्वतंत्रता में गांधी जी के अभूतपूर्व योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता।
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