
नई दिल्ली: दुनियाभर के देशों ने कोरोना वायरस को रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन लगाया है. लॉकडाउन ने कोरोना वायरस को फैलने से तो रोका, लेकिन इस दौरान लोग घरों में कैदियों जैसा महसूस करने लगे. इस लॉकडाउन ने लोगों को मानसिक तनाव से ग्रस्त कर दिया और जिसकी वजह से घरेलू हिंसा को बढ़ावा मिला.
हालांकि रूक-रूक चल रहे इस लॉकडाउन के चलते दिमाग की स्थिरता ने कई घर उजाड़े, तो कई हत्यारे भी पैदा हुये. पिछले डेढ़ साल से घरेलू हिंसा के मामलों में सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिला है, लोगों में तनाव इतना बढ़ गया है कि दूसरों को चोट पहुचाने के साथ साथ लोग खुद को भी चोट पहुचा रहे हैं. कोरोना और लॉकडाउन के कारण लोगों में तनाव बेहद ज्यादा बढ़ गया है. लॉकडाउन के कारण सारा दिन पति पत्नी घर मे एक साथ रह कर परेशान हो जाते हैं. जिसके कारण उनको स्पेस टाइम नही मिल रहा है. ये एक बड़ी समस्या है जिससे कई सारे घरेलू हिंसा के केस आते हैं.
बता दे कि दिल्ली महिला आयोग के अनुसार लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा की शिकायतों की संख्या में 2019 के मुकाबले बहुत ज्यादा वृद्धि देखने को मिली. आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में आयोग को घरेलू हिंसा से संबंधित 2,960 शिकायतें मिली थीं. जबकि 2020 में 5,297 शिकायतें प्राप्त हुईं और यह सिलसिला अब भी चल रहा है.आधिकारिक आंकड़ों को देखे तो, वर्ष 2019 में आयोग को महिलाओं के विरुद्ध किए गए अपराध की कुल 19,730 शिकायतें मिलीं थी. जबकि 2020 में यह संख्या 23,722 पर पहुंच गई. पिछले लॉकडाउन के खत्म होने के एक साल बाद भी महिला आयोग को हर महीने महिलाओं के प्रति अपराधिक घटनाओं की दो हजार से अधिक शिकायतें मिल रही हैं. जिनमें से लगभग एक चौथाई घरेलू हिंसा से संबंधित हैं.
राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2021 से 25 मार्च 2021 के बीच महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की 1,463 शिकायतें प्राप्त हुईं. पिछले साल कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन लगाया गया था. लेकिन इसके कारण घरेलू हिंसा की कई पीड़िताएं उनके साथ फंस गई थीं. जो उनका अत्याचार करते थे.
महिलाओं के अलावा युवा लड़के लड़कियों में भी पढ़ाई, कैरियर को लेकर काफी तनाव बहुत बढ़ गया है. लॉकडाउन में घर मे पड़े दिमाग चलना बंद हो जाता है. लॉकडाउन के दौरान लोगों को कई वजहों से मानसिक प्रभाव पड़ा है. किसी का रोजगार चला गया आर्थिक नुकसान हो गया तो कई लोग कोरोना का बहुत ज़्यादा डर लेकर बैठे गए हैं.
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