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युवाओं की ये रात की आदत बन रही खतरनाक बीमारियों का कारण, वक्त रहते आज ही संभल जाए; नहीं तो...

युवाओं की ये रात की आदत बन रही खतरनाक बीमारियों का कारण, वक्त रहते आज ही संभल जाए; नहीं तो...

Youth Health Alert:आज की दौड़भाग वाली जिंदगी ने सबकी सेहत को खतरे में डाल दिया है। इसका सबसे ज्यादा असर युवाओं में देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया की चकाचौंध और एंटरटेनमेंट के नाम पर रात के पहरों में फोन या टीवी से चिपक जाना, यह आदत अब सिर्फ 'रिलैक्सेशन' नहीं, बल्कि एक साइलेंट किलर बन चुकी है। विशेषज्ञों ने हाल ही में युवाओं को सतर्क किया है। उनके अनुसार, लेट नाइट स्क्रीन टाइम से नींद चक्र बिगड़ रहा है, जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर होकर डायबिटीज, हार्ट डिजीज और ऑटोइम्यून डिसऑर्डर जैसी घातक बीमारियां घरों में घुस रही हैं।

लेट नाइट स्क्रीन टाइम

आजकल 18-35 साल के युवा रात 11 बजे के बाद भी रील्स, शॉर्ट वीडियोज या वेब सीरीज में खोए रहते हैं। एक सर्वे के मुताबिक, भारत में औसतन 70% युवा सोने से पहले कम से कम 2 घंटे स्क्रीन पर बिताते हैं। लेकिन समस्या यह है कि फोन या टीवी की ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन (नींद का नियंत्रक) को दबा देती है, जिससे नींद की गुणवत्ता गिर जाती है। नतीजा? सुबह थकान, दिनभर चिड़चिड़ापन और लंबे समय में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का पतन। यह आदत 'इंजॉय' के बहाने शरीर को धोखा दे रही है। रात में स्क्रीन से निकलने वाली कृत्रिम रोशनी मस्तिष्क को 'दिन' का संकेत देती है, जिससे इम्यून सिस्टम रिचार्ज नहीं हो पाता।

2025 में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, नींद की कमी से युवाओं में सूजन (इन्फ्लेमेशन) 30% तक बढ़ गई है, जो क्रॉनिक बीमारियों का दरवाजा खोल देती है।  यह आदत सिर्फ थकान नहीं लाती, बल्कि गंभीर रोगों को आमंत्रित करती है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की 2025 साइंटिफिक सेशन स्टडी में पाया गया कि रात में रोशनी (स्क्रीन सहित) के संपर्क से ब्लड वेसल्स में सूजन बढ़ती है, जिससे धमनियां सख्त हो जाती हैं। नतीजा? हार्ट अटैक का खतरा 47% और स्ट्रोक का 28% बढ़ जाता है। स्टडी में 466 प्रतिभागियों पर निगरानी की गई, जहां रात में अधिक रोशनी वाले समूह में 5 सालों में गंभीर हृदय रोग का जोखिम 35% ज्यादा पाया गया।

कम नींद से बढ़ जाती है कई बीमारियां

युवाओं में यह ट्रेंड और खतरनाक है। कम नींद से डायबिटीज टाइप-2 का रिस्क 40% ऊंचा हो जाता है, क्योंकि ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है। साथ ही, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर जैसे रूमेटॉइड आर्थराइटिस या थायरॉइड समस्याएं भी बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह 'घरेलू महामारी' बन चुकी है – जहां एक सदस्य की खराब नींद पूरे परिवार की सेहत पर असर डालती है, जैसे स्ट्रेस ट्रांसफर या अनहेल्दी ईटिंग हैबिट्स। 2025 की वर्ल्ड हेल्थ रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भारत में 25-35 साल के 20% युवा पहले ही नींद संबंधी डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं, जो लंबे समय में कैंसर रिस्क भी बढ़ा सकता है।

डॉक्टरों की सख्त चेतावनी

इस मामले में डॉक्टर्स ने साफ शब्दों में कहा है कि रात में स्क्रीन से दूर रहें, वरना इम्यून सिस्टम कमजोर होकर बीमारियां घर में घुसेंगी। इसी तरह, कार्डियोलॉजिस्ट्स की 2025 स्टडीज में जोर दिया गया है कि युवाओं को रात 10 बजे के बाद डिजिटल डिटॉक्स अपनाना चाहिए। एक अन्य विशेषज्ञ ने बताया कि स्क्रीन टाइम से हार्मोनल असंतुलन युवाओं में हाई BP और कोलेस्ट्रॉल को ट्रिगर कर रहा है, भले ही फैमिली हिस्ट्री न हो।

विशेषज्ञों की मानें तो यह आदत 'मॉडर्न लाइफस्टाइल किलर' है। 2025 में जारी WHO गाइडलाइंस में साफ कहा गया है कि रात की रोशनी पॉल्यूशन से हृदय रोगों में 22% की वृद्धि हो रही है। महिलाओं में तो यह खतरा और गंभीर है, क्योंकि नेचुरल प्रोटेक्शन कमजोर पड़ जाता है।

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