
नई दिल्ली: देश में त्योहारों का सिलसिला जारी है। दहशरे के बाद अब देश में करवा चौथ व्रत की तैयारियां शुरू हो गई है। करवा चौथ को लेकर बाजार सज रहे है। करवा चौथ में शादीशुदा महिलाएं अपनी पति की लंबी उम्र के लिए उपवास करते है। वहीं इस साल 13 अक्टूबर को करवा चौथ का त्योहार मनाया जाएंगा। करवा चौथ में चांद को देखकर महिलाएं अपना व्रत को खोलती है। लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि करवा चौथ व्रत को खोलने के लिए चांद को ही क्यों देखा जाता है?
चांद की क्यों की जाती है पूजा
पौराणिक कथाओं और रामायण के अनुसार, एक बार भगवान राम ने पूर्व दिशा की तरफ चमकते हुए चंद्रमा को देखा और अपने आसपास मौजूद सभी लोगों से पूछा कि चंद्रमा में जो कालापन दिखाई दे रहा है वह क्या है? सभी उपस्थित लोगों ने अपने-अपने तर्क देकर सवाल का जवाब दिया। इस पर भगवान राम ने बताया कि चंद्रमा में कालापन उसके विष के कारण है। वह अपनी विषयुक्त किरणों से वियोगी नर-नारियों को जलाता रहता है। यदि बात करें मनोविज्ञान की तो उसके अनुसार, जो पति-पत्नी किसी कारणवश एक दूसरे से अलग हो जाते हैं, उन पर चंद्रमा की किरणें कष्ट पहुंचाती हैं, इसलिए करवा चौथ पर चंद्रमा की पूजा कर महिलाएं कामना करती हैं कि चंद्रमा के कारण उन्हें अपने पति का वियोग ना सहना पड़े।
करवा चौथ का व्रत
करवा चौथ का त्योहार हर साल कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन सभी पत्नियां अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। करवा चौथ के व्रत को काफी मुश्किल माना जाता है क्योंकि महिलाएं इस दिन निर्जल व्रत रखती हैं और चांद को देखने के बाद ही अपना व्रत खोलती हैं। विवाहित महिलाएं इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा करती हैं और रात में चांद के दर्शन और उनको अर्घ्य देने के बाद ही व्रत को तोड़ती हैं।
करवा चौथ का शुभमुहूर्त
बृहस्पतिवार, 13अक्टूबर 2022को है।
करवा चौथ पूजा मुहूर्त - शाम 06बजकर 17मिनट से शाम 07बजकर 31मिनट तक
अवधि - 01घण्टा 13मिनट्स
करवा चौथ व्रत समय - सुबह 06बजकर 32मिनट से रात 08बजकर 48मिनट तक
करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय - 08:48पी एम
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - अक्टूबर 13, 2022को सुबह 01बजकर 59मिनट से शुरू
चतुर्थी तिथि समाप्त - अक्टूबर 14, 2022को सुबह 03बजकर 08मिनट पर खत्म
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