
नई दिल्ली: भारत में लगातार त्योहारों का सिलसिला जारी है। दहशरे के बाद अब देश में करवा चौथ व्रत की तैयारियों में माहिलाएं लग गई है। बता दें कि प्राचीनकाल से महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए यहह व्रत करती हैं और ईश्वर से आशीर्वाद प्राप्त करती है। इसको लेकर आज हम आपको बताएंगे कि यहय त्योहार क्यों मनाया जाता है? इसको मनाने की क्या है परंपरा?
करवा चौथ का व्रत
करवा चौथ का त्योहार हर साल कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन सभी पत्नियां अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। करवा चौथ के व्रत को काफी मुश्किल माना जाता है क्योंकि महिलाएं इस दिन निर्जल व्रत रखती हैं और चांद को देखने के बाद ही अपना व्रत खोलती हैं। विवाहित महिलाएं इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा करती हैं और रात में चांद के दर्शन और उनको अर्घ्य देने के बाद ही व्रत को तोड़ती हैं।
करवा चौथ का शुभमुहूर्त
करवा चौथ बृहस्पतिवार, 13 अक्टूबर 2022 को है
करवा चौथ पूजा मुहूर्त - शाम 06 बजकर 17 मिनट से शाम 07 बजकर 31 मिनट तक
अवधि - 01 घण्टा 13 मिनट्स
करवा चौथ व्रत समय - सुबह 06 बजकर 32 मिनट से रात 08 बजकर 48 मिनट तक
करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय - 08:48 पी एम
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - अक्टूबर 13, 2022 को सुबह 01 बजकर 59 मिनट से शुरू
चतुर्थी तिथि समाप्त - अक्टूबर 14, 2022 को सुबह 03 बजकर 08 मिनट पर खत्म
मनाया जाता है करवा चौथ
पौराणिक काल से यह मान्यता चली आ रही है कि पतिव्रता सती सावित्री के पति सत्यवान को लेने जब यमराज धरती पर आए तो सत्यवान की पत्नी ने यमराज से अपने पति के प्राण वापस मांगने की प्रार्थना की। उसने यमराज से कहा कि वह उसके सुहाग को वापस लौटा दें। मगर यमराज ने उसकी बात नहीं मानी। इस पर सावित्री अन जल त्यागकर अपने पति के मृत शरीर के पास बैठकर विलाप करने लगी। काफी समय तक सावित्री के हठ को देखकर यमराज को उस पर दया आ गई। यमराज ने उससे वर मांगने को कहा। इस पर सावित्री ने कई बच्चों की मां बनने का वर मांग लिया।
बता दें, सावित्री पतिव्रता नारी थी और अपने पति के अलावा किसी के बारे में सोच भी नहीं सकती थी तो यमराज को भी उसके आगे झुकना पड़ा और सत्यवान को जीवित कर दिया। तभी से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए महिलाएं सावित्री का अनुसरण करते हुए निर्जला व्रत करती हैं।
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