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हिमालय की ऊंचाइयों में बसा कार्तिक स्वामी मंदिर, जान लें ट्रेकिंग के जरूरी टिप्स

हिमालय की ऊंचाइयों में बसा कार्तिक स्वामी मंदिर, जान लें ट्रेकिंग के जरूरी टिप्स

Kartik Swami Trek Rudraprayag: देवभूमि उत्तराखंड अपनी खुबसूरत वादियों और प्राचीन मंदिर के साथ-साथ ट्रेक के लिए दुनिया भर में मशहूर है| देश-विदेश से टूरिस्ट यहां घूमने के लिए आते हैं| गर्मियों की छुट्टियों में भीड़ बढ़ती जाती है| आज हम आपको उत्तराखंड के एक ऐसे ट्रेक के बारे में बताएंगे, जिस पर जाकर आपको मन की शांति के साथ आध्यात्मिक अनुभव भी होगा|

रुद्रप्रयाग में स्थित कार्तिक स्वामी ट्रेक पर्यटकों की फेवरेट प्लेसस लिस्ट में शामिल हो रहा है| यह ट्रेक सिर्फ 3 किलोमीटर का है, जिसमें आपको खूबसरत नजारे देखने को मिलेंगे|

कार्तिक स्वामी ट्रेक टूर

कार्तिक स्वामी तक पहुंचने के लिए आपको करीब 3 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी होती है| यह कनकचौरी गांव से शुरू होता है जोकि रुद्रप्रयाग से करीब 40 किलोमीटर दूर बसा हुआ है| ट्रेक पत्थर की सीढ़ियों और घने जंगलों से होते हुए आगे बढ़ता है|

रास्ते में ठंडी हवाएं और पड़ियों की शांति आपका मन मोह लेगी| कनकचौरी टैक्सी या बसों और प्राइवेट गाड़ी से आराम से पहुंचा जा सकता है|

मंदिर से खूबसूरत दिखता है नजारा

जानकारी के अनुसार, कार्तिक स्वामी मंदिर करीब 3050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है| मंदिर के टॉप से हिमालय की ऊंची चोटियां नजर आती हैं| यहां से नीलकंठ, चौखंबा समेत कई पर्वत श्रृंखलाएं 360 एंगल में देखने को मिलती हैं. कार्तिक स्वामी ट्रेक को ज्यादातर लोग सनराइज और सनसेट के लिए करते हैं| साथ ही भगवान कार्तिक का आशीर्वाद लेने के लिए|

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घूमने का बेस्ट टाइम

कार्तिक स्वामी ट्रेक के लिए मार्च और अप्रैल का महीना सबसे खास माना जाता है| इस दौरान लाल फूल से पूरा जंगल सजा होता है यानी पर्यटकों को प्रकृति की खूबसूरती देखने को मिलती है| बेस्ट टाइम जून-अक्टूबर से नवंबर तक का माना जाता है|

इन बातों का रखें ध्यान

कार्तिक स्वामी मंदिर का ट्रेक आसान जरूर माना जाता है, लेकिन पहाड़ी रास्तों में थोड़ी सावधानी बहुत जरूरी होती है। ट्रेक के दौरान अच्छे ग्रिप वाले जूते पहनें, क्योंकि कई जगह रास्ता फिसलन भरा हो सकता है। सुबह जल्दी ट्रेक शुरू करना बेहतर रहता है ताकि मौसम खराब होने या अंधेरा होने से पहले वापसी हो सके।

अपने साथ पानी, हल्का स्नैक्स और जरूरी दवाइयाँ जरूर रखें। पहाड़ों में मौसम अचानक बदल सकता है, इसलिए हल्की जैकेट या रेनकोट साथ रखना समझदारी है। ट्रेक के दौरान जल्दबाज़ी न करें, आराम-आराम से चलें और प्रकृति की शांति का आनंद लें।
 

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