
नई दिल्ली: आज देशभर में जीवित्पुत्रिका का त्योहार मनाया जा रहा है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जीवित्पुत्रिका व्रत पुत्र प्राप्ति और संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। इसे जितिया या जिउतिया व्रत के नाम से जाना जाता है। वहीं इस व्रत की बात करें तो ये कुल तीन दिनों तक चलता है, जिसकी शुरूआत नहीए-खाए से की जाती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाता है। इस बार यह व्रत 18 सितंबर 2022, रविवार को निर्जला रखा जाएगा जिसकी तिथि दोपहर 04 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। अगले दिन यानी 19 सितंबर सुबह 06 बजकर 10 मिनट सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जाएगा।
व्रत की विधि
जितिया व्रत के पहले दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। उसके बाद पूजा करें। इसके बाद महिलाएं भोजन ग्रहण करती हैं और उसके बाद पूरे दिन वो कुछ भी नहीं खाती। दूसरे दिन सुबह स्नान के बाद महिलाएं पहले पूजा पाठ करती हैं और फिर पूरा दिन निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत का पारण छठ व्रत की तरह तीसरे दिन किया जाता है। पारण से पहले महिलाएं सूर्य को अर्घ्य देती हैं, जिसके बाद ही वह कुछ खाना खा सकती हैं। इस व्रत के तीसरे दिन झोर भात, मरुआ की रोटी और नोनी का साग खाया जाता है। अष्टमी के दिन प्रदोष काल में महिलाएं जीमूत वाहन की पूजा करती हैं। पूजा के बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनी जाती है।
जितिया व्रत की कथा और पारण
इस व्रत की शुरूआत और पारण दोनों ही महत्वपूर्ण है। व्रत की शुरूआत नहाय-खाए के साथ होती है। व्रत के शुरू में महिलाएं सुबह सरगी खाती है। इसके बाद शाम को अग्रदेव भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा के साथ जीमूतवाहन की कथा सुनती हैं। खीरा, चना, पेड़ा, धूप की माला, लांग, इलाइची, पान-सुपारी सहित अन्य सामग्रियां अपने-अपने विधान अनुसार अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद पारण में इस दिन मडुआ की रोटी के साथ -साथ नोनी साग और सात प्रकार की सब्जी बनाने की परंपरा है।
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